उदित नारायण स्नातकोत्तर महाविद्यालय पडरौना, कुशीनगर मे 20 अप्रैल 2026 को भूगोल विभाग के द्वारा एकदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसका शोध शीर्षक ‘‘पर्यावरणीय समस्याओं में शोध पद्धति की भूमिका’’ था । कार्यक्रम का प्रारम्भः सरस्वती वंदना से हुआ । जिसे प्रियंका, अनामिका एवं आँचल मध्येशिया ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन विभागाध्यक्ष एवं संगोष्ठी समन्वयक डॉ. संजय कुमार सिंह ने किया तथा साथ ही विषय का प्रवर्तन भी इनके द्वारा किया गया। मुख्य वक्ता प्रोफेसर विश्वम्भर नाथ शर्मा, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी ने इस अवसर पर पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान में अनुसंधान पद्धति पर अपना विषद व्याख्यान प्रस्तुत किया। सर्वप्रथम, उन्होंने पर्यावरणीय समस्या के संदर्भ में तथ्यों को स्पष्ट किया तथा इसे एक उदाहरण के द्वारा पडरौना के सन्दर्भ में आद्रभूमि पर बढ़ता संकट , समाधान, संरक्षण एवं महत्व के साथ ही उसकी मानव जीवन और पर्यावरण के मध्य बढ़ते अंतराल को स्पष्ट किया । साथ ही उन्होंने पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान में शोध पद्धति की भूमिका को क्रमवार स्पष्ट किया अंत में अपने अध्यक्षीय उद्बोधन ने प्रोफेसर ममता मणि त्रिपाठी ने छात्र छात्राओं से स्थानीय समस्या को लेकर शोध करने एवं उसके समाधान के प्रति जन सहभागिता को बढ़ाने का आह्वान किया । कार्यक्रम में महाविद्यालय के बड़े पैमाने पर अध्यापक डॉ. अमित कुमार वर्मा, डॉ. आजाद प्रकाश, डॉ. प्रदीप कुमार सिंह, डॉ. अमृता सिंह, प्रयोगशाला सहायक राजन कुमार गौतम, शोध छात्र दिव्यांशु, छात्रा प्रियंका, झलक, छात्र विजय यादव, गौरव विशाल चौरसिया आदि उपस्थित रहे। स संजय शर्मा, कुशीनगर
पर्यावरणीय समस्याओं में शोध पद्धति की भूमिका पर संगोष्ठी
- Post author:Paryavaranurjatimes
- Post published:May 10, 2026
- Post category:गतिविधियां
