तमिलनाडु के कलपक्कम में स्वदेशी रूप से डिजाइन और तैयार प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने क्रिटिकैलिटी हासिल कर दुनिया को चौंका दिया है। भारत की आजादी के बाद दिग्गज भौतिक विज्ञानी होमी जहांगीर भाभा ने थ्री-स्टेज न्यूक्लियर रोडमैप तैयार किया, इसके छह दशक बाद, देश ने चुपचाप स्टेज-प्प् में कदम रख दिया है। यह किसी धूम-धड़ाके के साथ नहीं, बल्कि तमिलनाडु के तट पर स्थित एक रिएक्टर के अंदर शुरू हुई एक नियंत्रित, अपने-आप चलने वाली प्रतिक्रिया के साथ हुआ है।
6 अप्रैल, 2026 को, कलपक्कम में भारत के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (च्थ्ठत्) ने ‘क्रिटिकैलिटी’ हासिल कर ली। यह वह प्वाइंट है जब कोई परमाणु रिएक्टर अपने-आप एक लगातार चलने वाली चेन रिएक्शन को बनाए रखता है। यह देश की नागरिक परमाणु यात्रा में एक निर्णायक कदम है।
क्रिटिकैलिटी क्या है: आम बोलचाल की भाषा में, क्रिटिकल होना सुनने में चिंताजनक लग सकता है, लेकिन परमाणु इंजीनियरिंग में यही गोल होता है। क्रिटिकैलिटी उस प्वाइंट को दर्शाती है जब कोई परमाणु रिएक्टर एक अपने-आप चलने वाली चेन रिएक्शन हासिल कर लेता है। यह पूरी क्षमता से बिजली उत्पादन शुरू होने से पहले का एक अहम पड़ाव है, जो इस बात की पुष्टि करता है कि रिएक्टर का कोर ठीक वैसे ही काम कर रहा है जैसा उसे डिजाइन किया गया था। इसे आप उस पल की तरह समझ सकते हैं जब कोई इंजन, सालों तक कागजों पर डिजाइन बनने के बाद, पहली बार अपनी खुद की शक्ति से चालू होता है।
इस रिएक्टर में क्या खास है: भारत ही नहीं और दुनिया भर में ज्यादातर परमाणु संयंत्र यूरेनियम ईंधन पर चलते हैं। उसे इस्तेमाल करते हैं, और फिर बंद हो जाते हैं। लेकिन प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (च्थ्ठत्) कुछ बहुत ही अनोखा काम करता है। यह जितना परमाणु ईंधन जलाता है, उससे कहीं ज्यादा बनाता है। इसी वजह से इसे ‘ब्रीडर’ रिएक्टर कहा जाता है।
च्थ्ठत् की बिजली उत्पादन क्षमता 500 मेगावाट है और यह कूलेंट (शीतलक) के तौर पर तरल सोडियम का इस्तेमाल करता है। यह यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित आक्साइड ईंधन पर चलता है, जिसे रिएक्टर के कोर में डाला जाता है और जिसके चारों ओर यूरेनियम-238 की एक परत होती है। विखंडन की प्रक्रिया इस परत के साथ रिएक्ट करती है और यूरेनियम-238 को बदल देती है या उसका रूपांतरण कर देती है। इससे रिएक्टर की ओर से इस्तेमाल किए गए प्लूटोनियम से कहीं ज्यादा प्लूटोनियम बनता है। इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (प्ळब्।त्) से डिजाइन किया गया, और भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (ठभ्।टप्छप्) से निर्मित और संचालित, च्थ्ठत् भारत की दीर्घकालिक परमाणु रणनीति का एक प्रमुख घटक है। इसमें 200 से अधिक भारतीय उद्योगों का बड़ा योगदान है, जिनमें छोटे और मध्यम उद्यम भी शामिल हैं।
मास्टरस्ट्रोक है यह रिएक्टर: इसे समझने के लिए कि यह क्षण इतना महत्वपूर्ण क्यों है? आपको भारत की उस लंबी रणनीति को समझना होगा जिसे भारत 1960 के दशक से अपना रहा है। भारत ने तीन-चरणों वाला परमाणु ईंधन कार्यक्रम अपनाया और तब से लगातार इसी दिशा में काम कर रहा है। पहले फेज में, प्राकृतिक यूरेनियम से चलने वाले प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर (च्भ्ॅत्) बिजली पैदा करते हैं और उप-उत्पाद के रूप में प्लूटोनियम बनाते हैं। फिर उस प्लूटोनियम का इस्तेमाल दूसरे चरण में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर यानी च्थ्ठत् के लिए मिश्रित आक्साइड ईंधन बनाने में किया जाता है। यह दूसरा चरण थोरियम का इस्तेमाल करके यूरेनियम-233 नाम का एक विखंडनीय पदार्थ भी बनाता है, जो रिएक्टरों के तीसरे और अंतिम चरण के लिए ईंधन का काम करता है।
थोरियम ही क्यों अंतिम लक्ष्यः इस पूरी प्रक्रिया का अंतिम लक्ष्य हमेशा से थोरियम ही रहा है। भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े थोरियम भंडार में से एक है, जिसका अनुमान 8,00,000 टन से कहीं अधिक है। यह भंडार मुख्य रूप से ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल की मोनाजाइट रेत में केंद्रित है। थोरियम का सीधे परमाणु ईंधन के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता, लेकिन च्थ्ठत् वह मशीन है जो इसे ऐसे पदार्थ में बदलना शुरू करती है जिसका उपयोग ईंधन के रूप में किया जा सके। भारत अपने यूरेनियम का अधिकांश हिस्सा आयात करता है; जबकि थोरियम पहले से ही भारतीय धरती के नीचे भारी मात्रा में मौजूद है। इसका रणनीतिक तर्क अपने आप ही स्पष्ट हो जाता है।
देरी पर उम्मीदों भरा सफरः इस मील के पत्थर तक पहुंचने का रास्ता लंबा और खर्चीला था। हालांकि निर्माण कार्य मूल रूप से 2010 तक पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन इस प्रोजेक्ट में कई बार देरी हुई, और इसकी लागत शुरुआती अनुमान (3,492 करोड़ रुपये) से बढ़कर दोगुनी से भी अधिक हो गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 मार्च, 2024 को कलपक्कम का दौरा किया, ताकि वे कोर लोडिंग की शुरुआत के साक्षी बन सकें।
यह रिएक्टर में पहली बार ईंधन डालने की प्रक्रिया है। इसके लिए विनियामक मंजूरी (रेगुलेटरी क्लीयरेंस) भी बहुत ही सावधानीपूर्वक और चरणबद्ध तरीके से दी गई। परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (।म्त्ठ) ने क्रिटिकैलिटी की ओर पहला कदम बढ़ाने की अनुमति तभी दी, जब उसने कई स्तरों पर सुरक्षा की गहन समीक्षा कर ली। साइट पर मौजूद पर्यवेक्षकों की टीम से नियमित निरीक्षण करवा लिया, और सुरक्षा से संबंधित विस्तृत दस्तावेजों का गहन मूल्यांकन कर लिया। आखिरकार 6 अप्रैल, 2026 को क्रिटिकैलिटी हासिल कर ली गई।
आगे क्या होगाः क्रिटिकैलिटी तक पहुंचने का मतलब यह नहीं है कि तमिलनाडु में कल ही बिजली की रोशनी बढ़ जाएगी। एक बार जब लगातार न्यूक्लियर चेन रिएक्शन हासिल हो जाता है, तो रिएक्टर के व्यवहार को और बेहतर ढंग से समझने और उसका आकलन करने के लिए कम पावर वाले फिजिक्स के कई प्रयोग किए जाएंगे। उसके बाद, पावर लेवल को धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा, और हर कदम के लिए रेगुलेटरी मंजूरी लेना जरूरी होगी। अगला अहम पड़ाव होगा रिएक्टर को इलेक्ट्रिकल ग्रिड से जोड़ना, ताकि कमर्शियल आधार पर बिजली पैदा की जा सके। इसके लिए ।म्त्ठ से मंजूरी मिलना बाकी है। अगले चरण में कल्पक्कम में दो और फास्ट ब्रीडर रिएक्टर बनाने की योजना है, जो इस बात पर निर्भर करेगा कि डिपार्टमेंट आफ एटामिक एनर्जी च्थ्ठत् के परफार्मेंस से कितना संतुष्ट है।
भारत का परमाणु सपनाः एक बार जब यह सफलतापूर्वक कमर्शियल स्तर पर शुरू हो जाएगा, तो भारत दुनिया के उन गिने-चुने देशों में से एक बन जाएगा जो कमर्शियल पैमाने पर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर चलाते हैं। इस खास लेकिन रणनीतिक रूप से अहम टेक्नोलाजी में भारत रूस के साथ एक अग्रणी देश के तौर पर शामिल हो जाएगा। यह उपलब्धि महत्वपूर्ण है, लेकिन विश्लेषक इस बात को लेकर संयमित हैं कि अभी और क्या-क्या करना बाकी है।
एक अहम पड़ाव पारः इस टेक्नोलाजी को बड़े पैमाने पर कमर्शियल बनाना, थोरियम-आधारित इस्तेमाल हो चुके ईंधन की रीप्रोसेसिंग करना, और ऐसे ही कई और रिएक्टर बनाना- ये सभी ऐसे काम हैं जो अभी भी बाकी हैं और जिनमें शायद कई दशक लग सकते हैं। लेकिन मशीन चालू हो चुकी है, चेन रिएक्शन चल रहा है, और भारतीय आजादी के शुरुआती सालों में देखा गया एक सपना अब अपने सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गया है। कल्पक्कम में स्थित इस रिएक्टर की बिजली उत्पादन क्षमता 500 मेगावाट है। इस सफलता के लिए इस प्रयास में जुड़े सभी वैज्ञानिकों को तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और समस्त देश वासियों को बधाई।
स उत्तम सिंह गहरवार
