धार्मिक पर्यटन का भक्तिकाल: अयोध्या में बढ़ते तीर्थयात्री

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पांच सौ साल पहले जब अयोध्या में इस्लाम धर्मावलंबी आक्रांता राम मंदिर ध्वस्त कर रहे थे, तब तुलसी और सूरदास राम एवं कृष्ण की लीलाओं का चरित्र हिंदी की सहायक भाषाओं बृज, अवधि और भोजपुरी में रच रहे थे। जिससे हमलावरों के हमलों से आहत जनमानस जागरूक हो और अपनी सनातन सांस्कृतिक अस्मिता तथा देश की संप्रभुता के लिए बलिदानी भाव-बोध से जूझ जाए। निहत्था भक्त इसी थाथी के बूते इस्लाम की तलवार और फिरंगियों की तोपों से पूरे पांच सौ साल युद्धरत दिखाई देता रहा। इसी युद्वरत आम भारतीय ने हमें 15 अगस्त 1947 को आजादी दिलाई। तत्पश्चात भी वामपंथी वैचारिकी कुछ इस तरह गढ़ी जाती रही कि हम अपनी ऐतिहासिक सांस्कृतिक विरासत पर प्रष्नचिन्ह उठाने लग गए? मनमोहन सिंह सरकार ने राम और रामसेतु के अस्तित्व को ही झुठलाने का काम कर दिया।

अलबत्ता 2014 से नरेंद्र मोदी युग के आरंभ से बदलाव की कुछ ऐसी हवा चली कि अयोध्या में भगवान राम के जन्म-स्थल पर तो रामलला के विग्रह की स्थापना 22 जनवरी को हो ही रही है, इस्लामिक देश संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबूधाबी में राम मंदिर जैसा ही भव्य मंदिर बनकर तैयार है। 14 फरवरी को इस मंदिर के पट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खोलेंगे। इन दो मंदिरों के पट खुलने के साथ ही सनातन धर्म से जुड़े मंदिरों का पर्यटन विश्वव्यापी हो जाएगा और अयोध्या धाम में सबसे ज्यादा पर्यटकों का आवागमन बढ़ जाएगा।

अयोध्या में बढ़ते तीर्थयात्री
उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, बीते वर्ष 2.39 करोड़, यानी प्रतिदिन करीब 70 हजार तीर्थयात्री अयोध्या नगरी में पहुंचे। यात्रियों की यह आमद 2022 की तुलना में सौ गुना अधिक रही। ऐसा अनुमान है कि भगवान राम के मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या देश का सबसे बड़ा धार्मिक पर्यटन स्थल हो जाएगा। यहां प्रतिवर्ष दस करोड़ पर्यटकों के आने की उम्मीद जताई जा रही है। एक पर्यटक औसतन 2700 रुपए खर्च करता है, अर्थात अयोध्या ही नहीं समूचे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को इस पर्यटन से बल मिलेगा। इसी तर्ज पर सोमनाथ, वाराणसी, उज्जैन और केदारनाथ के मंदिरों में गलियारों का विस्तार हो गया है। इन तीर्थों के आधुनिक एवं सुविधानक हो जाने से पर्यटन का आकार बढ़ गया है। विश्वस्तरीय होटल, सड़क, हवाई और रेल सुविधाएं हो जाने से यात्रियों की संख्या उम्मीद से कहीं ज्यादा बढ़ी है। भारत में फिलहाल पर्यटन से जुड़ी जीडीपी का योगदान 5 से 6 प्रतिशत है, इसमें धार्मिक पर्यटन का हिस्सा अब तक आधा रहता है, जो अब निरंतर उछाल मार रहा है।

मंदिरों का चतुर्दिक विकास
उत्तरप्रदेश में धार्मिक पर्यटन में बढ़ोत्तरी से प्रभावित व प्रेरित होकर अन्य राज्य सरकारें भी धार्मिक स्थलों के संरचनात्मक विकास और ठहरने व आवागमन की सुविधाओं को बढ़ावा देने में लग गई हैं। असम के गुवाहाटी में कामाख्या मंदिर का 500 करोड़ रुपए की लागत से विकास हो रहा है। इस मंदिर के परिसर का क्षेत्र तीन हजार वर्गफीट से बढ़ाकर 10 हजार वर्गफीट किया जा रहा है। राजस्थान में गोविंद देव मंदिर, पुष्कर तीर्थ और बेनेश्वर धाम का विकास सौ-सौ करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है। बिहार सरकार भारतमाला धार्मिक संपर्क योजना के अंतर्गत उच्चैठ भगवती मंदिर से महिशि तारास्थल को जोड़ने के लिए मधुबनी के उमगांव से सहरसा तक के मार्ग को विस्तृत कर रही है। महाराष्ट्र सरकार कोल्हापुर में 250 करोड़ की लागत से महालक्ष्मी मंदिर गलियारा बना रही है। इसी प्रकार के प्रसिद्ध तीर्थस्थल नासिक से त्र्यंबकेश्वर मंदिर तक चैड़ा रास्ता बनाया जा रहा है। तेलंगाना में 1300 करोड़ की लागत से ययादि मंदिर का निर्माण किया गया है। दशावतारों में से भगवान नृसिंह के इस मंदिर के गर्भगृह में 125 किलो सोना लगा है। मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में 314 करोड़ रुपए से एक सौ एकड़ में लेटे हनुमान मंदिर-लोक और सलकनपुर श्रीदेवी महालोक बनाया जा रहा है।

सागर में रविदास मंदिर धाम, दतिया में पीतंबरा माईलोक ओरछा में रामराजा लोक, चित्रकूट में रामपथगमन लोक, ग्वालियर में शनिलोक और बड़वानी में नाग-लोक बनाए जाना प्रस्तावित हैं। उत्तरप्रदेश के मथुरा में मथुरा-वृंदावन गलियारा और यमुना नदी फ्रंट का विकास 250 करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है।

समुद्र में कृष्ण की द्वारका के दर्शन
हजारों साल पहले समुद्र में डूब चुकी भगवान कृष्ण की द्वारका के दर्शन पनडुब्बी से कराए जाने की तैयारी हो रही है। गुजरात सरकार श्रीमद् भागवत कथा और महाभारत में उल्लेखित द्वारका दर्शन के लिए अरब सागर में यात्री पनडुब्बी चलाने का अनूठा कार्य करने जा रही है। मोदी है तो मुमकिन है कि कहावत यहां चरितार्थ होने जा रही है। भारत सरकार की कंपनी मझगांव डाॅक शिपयार्ड के साथ गुजरात सरकार का एमओयू हो चुका है।
इस पनडुब्बी का संचालन मझगांव डाॅक करेगा। इस यात्रा का आरंभ इसी साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी या दीपावली तक हो सकती है। यह पनडुब्बी समुद्र में तीन सौ फीट गहरे तक जाएगी। इस रोमांचक इतिहास और पुरातत्व के अवषेशों से जुड़ी रोमांचक यात्रा में प्राचीन द्वारका तक पहुंचने में दो-तीन घंटे लगेंगे। यात्रा का किराया अधिक होगा, लेकिन आम आदमी के लिए सरकार छूट देगी।

35 टन वजनी यह पनडुब्बी वातानुकूलित होगी। दो कतारों में 24 यात्रियों को बैठने की सुविधा होगी। चिकित्सा किट साथ रहेगी। पनडुब्बी चलाने के लिए दो चालक, दो गोताखोर, एक मार्गदर्शन और तकनीशियन साथ रहेंगे। यात्रियों को आक्सीजन मास्क, फेस मास्क और स्कूबा ड्रेस संचालन करने वाली एजेंसी देगी। इस पनडुब्बी में प्राकृतिक उजाले का प्रबंध होगा। संचार और वीडियो वार्तालाप की सुविधाएं होंगी। पनडुब्बी में बैठे हुए स्क्रीन पर भीतर की हलचल और जीव-जंतुओं को देख व रिकार्ड कर सकेंगे। इस देव भूमि गलियारे के तहत बेट द्वारका समुद्री टापू को दुनिया के मानचित्र पर लाने की दृष्टि से सरकार सिग्नेचर पुल का निर्माण कर रही है। 900 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन यह पुल 2320 मीटर लंबा होगा। यह चार कतारों का केवल ब्रिज है। इस परियोजना में 12 ज्योतिर्लिंग में शामिल नागेश्वर मंदिर के अलावा हनुमान और उनके पुत्र मकरध्वज मंदिर का विकास भी हो रहा है।
अमेरिका भी हो रहा है मंदिरमय

भारत में ही नहीं अमेरिका में भी भारतवंशियों के लिए स्वार्णिम भक्ति-युग चल रहा है। 2016 में यहां 250 मंदिर थे, जो अब बढ़कर 750 हो गए हैं। अर्थात अमेरिका के प्रत्येक राज्य में करीब 12 मंदिर हैं। सर्वाधिक कैलिफोर्निया में 120, न्यूयाॅर्क में 100, फ्लोरिडा में 60 और जाॅर्जिया में 30 मंदिर हैं। भारत के बाहर न्यूजर्सी में सबसे बड़ा हिंदू मंदिर 800 करोड़ रुपए की लागत से बना है। ‘अक्षरधाम’ नामक इस मंदिर का परिसर 183 एकड़ में विस्तृत है। स्वामीनारायण संस्था ने इस मंदिर का निर्माण किया है।

12 वर्षों में निर्मित हुए इस मंदिर में 10 हजार मूर्तियां, दीवारों और खंभों पर उत्कीर्ण हैं। दीवारों पर वाद्ययंत्र भी उकेरे गए हैं। इस मंदिर के निर्माण हेतु सामग्री भारत, ग्रीस, बुल्गारिया, इटली और तुर्किये से लाइ गई है। ऐसा ही एक शिव-विष्णु का मंदिर मैरीलैंड में बना है। न्यूजर्सी का मंदिर कंबोडिया के अंगकोरवाट के बाद क्षेत्रफल में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है। यह मंदिर बारहवीं सदी में बना था, जो आज भी अपने मूल स्वरूप में सुरक्षित है।

कृत्रिम बुद्धि से मंदिरों के इतिहास व परंपराओं की जानकारी
भारत के अब प्रमुख मंदिरों की जानकारी हासिल करने के लिए एआई यानी कृत्रिम बुद्धिमता से जोड़ दिया गया है। यह शुरूआत कोरोना के कालखंड में हुई थी, जो अब बड़े व्यापार का रूप ले चुका है। उस समय जब वाहनों पर ब्रेक लगे थे और घरों से निकलना प्रतिबंधित था, तब अनेक मोबाइल एप्लिकेशन पर घर बैठे प्रसिद्ध मंदिरों में दर्शन, पूजा और प्रसाद वितरण का सिलसिला आरंभ हुआ था।

मंदिरों के संचालकों से संपर्क कर तब कंपनी प्रमुखों में पूजन-सामग्री व दान-दक्षिणा में होने वाले खर्च के साथ अपने लिए लाभ का यह धंधा शुरू किया था। यह अब एक पूरा पैकेज बन गया है। इससे एआई साॅफ्टवेयर के जरिए आॅनलाइन जुड़कर मंदिर के इतिहास, धार्मिक महत्व, परंपरा, रीति-रिवाज और पर्व विषेश व उत्सवों की जानकारी भी श्रद्धालुओं को दी जा रही हैं। यहां तक की वाॅक थू्र, यानी चलते हुए मंदिर परिसर के दर्शन करा दिए जाते हैं। 15-20 मिनट में भक्त घर बैठे चैन से पूरे मंदिर का दर्शन सपरिवार कर लेते हैं।
धार्मिक पर्यटन की आर्थिकी

अयोध्या में भागवान राम की प्राण-प्रतिष्ठा के साथ ही देश का धार्मिक पर्यटन एक लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था से ऊपर जाने की उम्मीद अर्थशास्त्री जता रहे हैं। भक्ति का यह व्यापार 10 से 15 प्रतिषत की वार्षिक दर से बढ़ रहा है। यहां तक की कई राज्यों में प्रमुख मंदिरों की आर्थिकी उस राज्य के कुल वार्षिक बजट से भी कहीं अधिक है। यदि ईश्वर दर्शन के इस धार्मिक पर्यटन में विवाह और दीपावली जैसे पर्व की आर्थिकी को भी जोड़ दिया जाए तो यह आर्थिकी कई लाख करोड़ की होगी? अतएव मर्यादा पुरुषोत्तम राम और कृष्ण की महिमा नैतिकता के प्रतिमान और मानवता के चरम आदर्श व उत्कर्ष से जुड़ी तो है ही, अब बड़ी आर्थिकी का भी आधार बन गई है। गोया यह धार्मिक पर्यटन का भक्तिकाल तो है ही, देश की अर्थव्यवस्था को नूतन व निरंतर बनाए रखने का भी बड़ा आयाम बनता दिखाई दे रहा है।
स प्रमोद भार्गव