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जानकारी
सूरज में समा जाएगी हमारी पृथ्वी
(01-10-2017)

अंतरिक्ष में हमारी पृथ्वी अनवरत सूरज के चारों ओर चक्कर लगा रही है। सूरज की परिक्रमा करती पृथ्वी अपनी ही धुरी पर घूम भी रही है। अनंत अंतरिक्ष में कई ग्रह, उपग्रह अपनी गति से घूम रहे हैं। कुछ खत्म भी हो रहे हैं। पृथ्वी के समीप कई ग्रह गुजरकर अपना प्रभाव भी यदा-कदा छोड़ते हैं। सूर्य तो पृथ्वी का जीवनदाता बना हुआ है। वैज्ञानिक पृथ्वी की आयु की गणना करते हुए कहते हैं कि उसके पास सिर्फ 3 से 5 अरब साल बचे हैं।

पृथ्वी का भविष्य कठिन होगा

पृथ्वी की आयु कम नहीं है। उसके पहले धरती पर इंसान बचेगा या नहीं, यह कहना मुश्किल है। पृथ्वी पर तेजी से बदलती हुई परिस्थितियों के मद्देनजर यही कहा जा सकता है कि आने वाला समय जीवन के लिए कठिनतर होता जाएगा, जहाॅं प्रकृति के रौद्र रूप का सामना इंसान कर रहा है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी पिछले 4.5 अरब साल से लगातार बदल रही है। सौरमंडल में उसकी जगह बदल रही है। पृथ्वी के भीतर भी विशाल भूखंड एक-दूसरे से जुड़ रहे हैं और अलग हो रहे हैं। ब्रह्मांड की गतिविधियां सेटेलाइट डाटा और पृथ्वी की भीतरी हलचल के आधार पर वैज्ञानिक धरती के भविष्य का अनुमान लगा रहे हैं।

सूरज के करीब होती रूप बदल रही है

हमारी पृथ्वी लगातार संघर्ष कर रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी सौरमंडल के ठंडे कोनों से निकल कर लगातार सूर्य के करीब आ रही है। सूर्य के गुरूत्व बल से होने वाले खिंचाव को कमजोर करने के लिए परिक्रमा करती पृथ्वी अपना रूप बदलती रहती है। महाद्वीप लगातार यात्रा कर रहे हैं। इसी के चलते धरती पर हिमालय जैसा पहाड़ बना, हजारों झीलें बनीं। धरती इस तरह नित नया रूप परिवर्तित कर अपने को बचाए रखने की कोशिश कर रही है।

टेक्टाॅनिक मूवमेंट के चलते महाद्वीप इधर-उधर होते हैं। धरती का गर्भ उसकी बाहरी सतह की तुलना में बहुत गरम है। गर्भ का तापमान 10 हजार डिग्री फारेनहाइट के बराबर है। ज्वालामुखी के अलावा जहाॅं से यह गर्मी बाहर आती है, उसे ‘रिंग आफ फायर’ कहा जाता है। यह गर्मी धरती के चुंबकीय क्षेत्र को बदलती रहती है, जो सूर्य और चन्द्रमा की ताकतों को हल्का करती है।

सूर्य और चन्द्रमा लगातार अपनी गुरूत्वीय ताकत से पृथ्वी की परिक्रमा को रोकने की कोशिश करते हैं। पृथ्वी की परिक्रमा जिस दिन रूक जाएगी, उसी दिन धरती पर जीवन का अंत हो जाएगा।

सूरज ही करेगा धरती का अंत

सूर्य पृथ्वी पर जीवन की शुरूआत करने में सबसे पहला है। ब्रह्मांड में मौजूद इस महातारे की मदद से धरती पर जीवन फल रहा है। लेकिन वक्त गुजरने के साथ सूरज ही पृथ्वी का अंत करने वाला साबित होगा। वैज्ञानिक कहते हैं कि सूर्य बुढ़ापे की ओर बढ़ रहा है। उसकी हाइड्रोजन पूरी तरह खत्म हो जाएगी, जिसके बाद हीलियम जलने लगेगी।

वैज्ञानिक साबित कर चुके हैं कि बुढ़ापे की ओर बढ़ते तारों का तापमान उनकी मौत तक बढ़ता जाता है। खगोलविदों के मुताबिक सूर्य लगातार बड़ा हो रहा है। उसी के साथ वह पहले से ज्यादा गर्म होता जा रहा है।

बदलता सूरज ढल रहा है

1.75 से 5 अरब साल बाद सूर्य की बाहरी सतह नेब्यूला में बदल जाएगी। वैज्ञानिक अनुमानों में यह कहा गया है। ऐसी स्थिति में सूर्य से निकलने वाली अथाह गर्मी और विकिरण धरती पर मौजूद जीवन को लीलने लगेंगे। धरती पर हालात ऐसे हो जाएंगे कि सारे समुद्र सूख जाएंगे। इसके साथ सूर्य इतना बड़ा आकार ले लेगा कि वह धरती के करीब आ जाएगा। तब जमीन पूरी तरह लावे में तब्दील हो जाएगी। सूर्य में होने वाले अंदरूनी विस्फोट धरती को अपने में समा लेंगे। हमारा भीतरी सौरमंडल पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगा।

सूर्य इसके बाद लगातार छोटा होता जाएगा, जो धरती के आकार का हो जाएगा। तब यह सिर्फ एक चमकीला तारा बनकर रह जाएगा, जिसमें दूसरे को ऊर्जा देने वाली ताकत नहीं रह जाएगी। तारा बना सूर्य धीरे-धीरे बुझ जाएगा। अगर पृथ्वी इसके बाद भी अस्तित्व में रही तो वक्त के साथ वह बेहद ठंडी हो जाएगी।

पृथ्वी को जब ऐसे हालात से गुजरना होगा, उसके लिए अभी काफी समय है। वैज्ञानिक कहते हैं कि तब तक इंसान इतनी तरक्की कर लेगा कि पृथ्वी को छोड़ दूसरे किसी ग्रह पर अपना पड़ाव डाल कर सुरक्षित हो जाएगा।

वीरेन्द्र शर्मा

छ.ग., विद्युत मंडल, भाटापारा, छ.ग.

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