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विज्ञान के बढ़ते कदम
भविष्य बिना बुढ़ापा वाला: रोगमुक्त जीवन
(01-10-2017)

जीवन को लम्बा और सुखमय बनाने की कोशिश में वैज्ञानिकों ने काफी हद तक कामयाबी हासिल कर ली है। लम्बे समय तक जवान बने रहकर बुढ़ापा को रोकना संभव हो गया है। वैज्ञानिकों ने बुढ़ापे को उलट कर लम्बी उम्र पाने की तरकीब खोज निकाली है। वैज्ञानिकों ने उम्मीद जताई है कि अब इस तकनीक के जरिए ऐसे नए उपचार विकसित किए जा सकेंगे, जो लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर रखने के साथ बिना बुढ़ापा का जीवन दे सकेंगे। वहीं कई खतरनाक रोगों से मुक्ति भी पाई जा सकेगी। 

शरीर की कोशिकाओं में परिवर्तन

दरअसल बुढ़ापा इसलिए आता है कि शरीर की कोशिकाएं तेजी से मरती है। वहीं उम्र बढ़ने के साथ नई कोशिकाओं को शरीर नहीं बना पाता। अमेरिका के साल्क इंस्टीट्यूटी के शोधकर्ताओं ने ऐसा ही तरीका ईजाद किया है, जिन्होंने शरीर की कोशिकाओं की रासायनिक प्रक्रिया में बदलाव कर सफलता पाई है। अध्ययन में पाया गया है कि भ्रूण अवस्था से जुड़े जीन की रूक-रूककर होने वाली अभिव्यक्ति में बदलाव बुढ़ापे के चिन्हों को पलट सकती है। जीन की अभिव्यक्ति एक विशेष जैविक प्रक्रिया है। 

इसके माध्यम से जीन में एकत्र सूचनाओं का इस्तेमाल कर किसी वास्तविक जीन उत्पाद का निर्माण होता है। आमतौर पर ज्यादातर जीन उत्पाद प्रोटीन होते हैं। हालांकि गैर प्रोटीन से ढके जीन के उत्पाद आरएनए हो सकते हैं। 

रोग व बुढ़ापा मुक्त जीवन

सवाल जीन की अभिव्यक्ति को बदलने का है, जिस पर शोधकर्ता कहते हैं कि हमारे यही का दिखावा है। जीन की अभिव्यक्ति बदलने से मनुष्य की त्वचा कोशिकाओं को फिर से युवा कोशिकाओं जैसा व्यवहार करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। साथ ही साथ इस तकनीक से असमय बुढ़ापे के रोग से ग्रस्त व्यक्ति में उस रोग को रोककर उसका जीवनकाल 30 फीसदी बढ़ाया जा सकता है।

शोधकर्ताओं ने यह भी पता लगा लिया कि कोशिकीय स्तर पर जो अवयव बुढ़ापे पैदा करने के लिए जिम्मेदार होते हैं, उन्हीं के जरिए स्वास्थ्य और जीवन अवधि को बढ़ाने वाले उपचार भी विकसित किए जा सकते हैं। शोधकर्ता जुआन कार्लोस इपिसुआ बेलगोंटे कहते हैं कि हमने पाया कि बुढ़ापा संभवतः एक ही दिशा में बढ़ने वाली प्रक्रिया नहीं है। यह एक लचीली प्रक्रिया है, जिसे सावधानीपूर्वक दूसरी दिशा में मोड़ा जा सकता है। यही दूसरी दिशा से जीवन बनाए रखने वाली है।

21वीं सदी में लोग पहले के मुकाबले ज्यादा लम्बा जीवन जी रहे हैं। लेकिन बढ़ती उम्र के साथ होने वाली बीमारियों का खतरा भी तेजी से बढ़ा है। दिल की बीमारियां और तंत्रिका तंत्र में क्षरण के कारण होने वाले रोग दुनिया में इस समय सर्वाधिक जोखिम वाले बने हैं। अगर कोशिका के स्तर पर बुढ़ापे की प्रक्रिया को रोका गया या पलटा गया तो ऐसे रोग से भी बचा जा सकता है। इस तकनीक में कैंसर के उपचार में मदद मिल सकती है।

बुढ़ापा रोकने जीन चुने गए

बुढ़ापे को रोकने के लिए शोधकर्ताओं ने ऐसे चार जीन की पहचान की है, जिनकी अभिव्यक्ति को बदला जा सकता है। जीन की अभिव्यक्ति को बदलकर किसी भी कोशिका को प्लूरी पोटेंट स्टेम कोशिकाओं में बदला जा सकता है। इस जीन को यामनाका कारक नाम दिया गया है। भ्रूण कोशिकाओं से हमारे शरीर में मौजूद किसी भी तरह की कोशिका निर्मित की जा सकती है। जब इन जीन में बदलाव किया जाता है, तब इनसे बनने वाली कोशिकाएं अपेक्षाकृत युवा दिखती है। ऐसा करना अब संभव हो गया है। 

यह शोध अध्ययन ‘सेल’ में प्रकाशित हुआ है, जिसमें अध्ययन कर्ताओं ने चूहों पर यह प्रयोग कर सफलता पाई है। इस तकनीक से न केवल बुढ़ापा की रोकथाम होगी, वहीं कई लाइलाज रोगों पर बिना दवा उपचार के काबू पाया जा सकेगा।

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