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कैरियर
सूक्ष्म जैविकी में कैरियर
(01-02-2015)

सूक्ष्म जैविकी जिसने कई कल्पनाओं को मूर्त रूप दिया है। इस क्षेत्र में हुए इनोवेशन (माइक्रोस्कोप) की वजह से एक माइक्रो बायोलाजिस्ट 0.25 माइक्रान या उससे भी कम आकार के सूक्ष्म जीवाणु को देख सकता है, उसका अध्ययन कर सकता है। 

सूक्ष्म जैविकी बायोलाजी की एक ब्रांच है, जिसमें प्रोटोजोआ, ऐल्गी, बैक्टीरिया, वायरस जैसे सूक्ष्म जीवाणुओं (माइक्रो आर्गेनिज्म) का अध्ययन किया जाता है। इसमें माइक्रो बायोलाजिस्ट इन जीवाणुओं (माइक्रोब्स) के इंसानों, पौधों और जानवरों पर पड़ने वाले पाजिटिव और निगेटिव प्रभाव को जानने की कोशिश करते हैं। बीमारियों की वजह जानने में मदद करते हैं। इसे अलावा जीन थेरेपी तकनीक के जरिये वे इंसानों में होने वाले सिस्टिक फिब्रियोसिस, कैंसर जैसे दूसरे जेनेटिक डिआर्डर्स के बारे में भी पता लगाते हैं। माइक्रो बायोलाजिस्ट आसपास के एरिया, इंसान, जानवर या फील्ड लोकेशन से सैंपल एकत्र करते हैं। फिर उन पर माइक्रोब्स को ग्रो करते हैं और स्टैंडर्ड लेबोरेट्री तकनीकी से एक विशेष माइक्रोब को अलग करते हैं। मेडिकल माइक्रोबायोलाजिस्ट खासतौर पर इस तरह की प्रक्रिया अपनाते हैं।

संभावनाएॅं

आज जिस तरह से दुनिया भर में नई-नई बीमारियां सामने आ रही हैं, उसे देखते हुए एक ई-माइक्रोब्स (सूक्ष्म जीवाणुओं) का अब भी पता लगाया जाना बाकी है। प्रमुख संक्रामक और असंक्रामक बीमारियों खासतौर पर ट्यूबरकुलोसिस, बर्डफ्लू, चिकनगुनिया, रोटावायरस, टायफायड, मलेरिया और एचपीवी के क्षेत्रों में माइक्रो बायोलाजिस्ट बखूबी टेस्ट करते हैं। इसलिए उनके लिए अवसरों की कमी नहीं है। 

माइक्रोबायोलाजिस्ट बैक्टीरियोलाजिस्ट, एनवायरमेंटल माइक्रोबायोलाजिस्ट, फूड माइक्रोबायोलाजिस्ट, इंडस्ट्रियल माइक्रोबायोलाजिस्ट, मेडिकल बायोलाजिस्ट, माइकोलाजिस्ट, बायोकेमिस्ट, बायोटेक्नोलाजिस्ट, सेलबायोलाजिस्ट, इम्युनोलाजिस्ट, वायरोलाजिस्ट, इम्ब्रियोलाजिस्ट आदि के रूप में कैरियर बना सकते हैं। इनकी गनर्वमेंट और प्राइवेट सेक्टर के हास्पीटल्स, लेबोरेटरीज, फूड ऐंडबेवरेज, फार्मास्युटिकल, वाटर प्रोसेसिंग प्लांट्स, होटल्स आदि में काफी मांग है। 

फार्मास्युटिकल के रिसर्च एंड डेवलपमेंट डिपार्टमेंट में अपाच्र्युनिटीज की कमी नहीं है। अगर लेखन में रूचि है तो साइंस राइटर के तौर पर भी अच्छा भविष्य बनाया जा सकता है। इसके साथ ही कालेज या यूनीवर्सिटी में बढ़ाने का मौका भी है। कालेज में पढ़ाने के लिए मास्टर डिग्री के साथ सीएसआईआर नेट क्वालिफाईड होना जरूरी है। जबकि डाॅक्टरेट के बाद आप्शंस कई गुना बढ़ जाते हैं।

पैकेज

माइक्रोबायोलिस्ट की सैलरी उसके स्पेशलाइजेशन पर डिपेंड करती है। शुरूआत में एक फ्रेशर 30 से 90 हजार रूपए महीना आसानी से कमा सकता है। एक्सपीरियंस और एक्सपर्टानाइजेशन के साथ सैलरी बढ़ती जाती है। इसे अलावा एक माइक्रोबायोलाजिस्ट कुछ नया इनोवेट करने पर उसका पेटेंट करा सकता है और फिर अपने प्रोडक्ट को बेचकर लाखों रूपए कमा सकता है। वह अपनी इंडीपेंडेंट लेबोरेटरी खोल सकता है। माइक्रोबायोलाजिस्ट पूर्व आरोपण आनुवंशिक निदान, जेनेटिक स्क्रीनिंग, फोरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में जेनेटिक फिंगर प्रिंटिंग, जनसंख्या आनुवंशिकी  सहित जीन थेरेपी (रोगाणु लाइन और दैहिक), क्लोनिंग, जेनेटि इंजीनियरिंग के साथ कैंसर के इलाज (जीन थेरेपी का एक रूप), भ्रूण में गड़बड़ी का उपयोगी सुधार, मानव जीनोम परियोजना, मानव आनुवंशिक जैव विविधता परियोजना आदि में काफी मांग है। विदेश की बात करें तो नासा जैसे स्पेस आर्गेनाइजेशन में माइक्रोबायोलाजिस्ट की काफी डिमांड है।

क्वालिफिकेशन

भारत की कई यूनीवर्सिटीज में सूक्ष्म जैविकी में अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट कोर्सेज उपलब्ध हैं। इसके लिए स्टूडेंट्स को फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स या बायोलाजी के साथ 12वीं पास होना चाहिए। वहीं पोस्ट ग्रेजुऐशन करने के लिए सूक्ष्म जैविकी या लाइफ साइंस में बैचलर्स डिग्री जरूरी है। इसके बाद वे अप्लायड सूक्ष्म जैविकी, मेडिकल सूक्ष्म जैविकी, क्लीनिकल रिसर्च, बायोइंफार्मेटिक्स, मालिक्यूलर बायोलाजी, बायोकेमिस्ट्री, फोरेंसिक साइंस जैसे सब्जेक्ट्स में मास्टर्स कर सकते हैं। जो लोग स्वतंत्र रूप से रिसर्च करना चाहते हैं, वे पीएचडी करने के बाद ऐसा कर सकते हैं।

शिक्षा संस्थान

- राष्ट्रीय इम्यूनोलाजी, संस्थान, नई दिल्ली।, - टाटा कैंसर संस्थान, मुॅुबई, -पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एवं रिसर्च संस्थान, चंडीगढ़, -अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली, -बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी, -मुॅंबई विश्वविद्यालय, मुॅंबई, -जेआईपीएमईआर, पांडिचेरी, -पांडिचेरी विश्वविद्यालय, पांडिचेरी, -आण्विक जीव विज्ञान रिसर्च इंस्टीट्यूट, एसआरएम विश्वविद्यालय, कांचीपुरम, तमिननाडु, -एशिया पैसिफिक इंस्टीट्यूट, पानीपत, -अल्फा इंजीनियरिंग कालेज, चेन्नई, आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना, प्रौद्योगिकी और प्रबंधन संस्थान, भुवनेश्वर, -देव भूमि इंस्टीट्यूट, देहरादून, -दिल्ली विश्वविद्यालय, नई दिल्ली, -सेंटजू इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी यूनीवर्सिटी, बंगलोर, वासिरेड्डी वेंकटाद्रि प्रौद्योगिकी संस्थान, गुंटूर, श्रीकृष्ण इंजीनियरिंग संस्थान, देहरादून, तमिलनाडु एग्रीकल्चर यूनीवर्सिटी, कोयंबटूर, यूनीवर्सिटी आफ कलकत्ता, कोलकाता, कोशिकीय व आण्विक जीव विज्ञान केन्द्र, हैदराबाद।

संजय गोस्वामी

यमुनाजी-13, एनगर, मुॅंबई-94

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