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कैरियर
मनोचिकित्सा के क्षेत्र में कैरियर
(01-03-2015)

मनोचिकित्सा के क्षेत्र में पिछले कुछ सालों में गेरेंटोलाजी के क्षेत्र में जबरदस्त उछाल आया है। यह वस्तुतः ओल्डऐज ह्यूमन बिहेवियर साइकोलाजी का क्षेत्र है, जिसमें उम्र दराज लोगों का उनके मनोरोग के अनुसार दवा दी जाती है। मनोचिकित्सा ने कैरियर के तमाम रास्ते खोल दिए हैं।
शरीर में टूटने, कटने-फटने का सर्जरी द्वारा इलाज सम्भव है। लेकिन मन में क्या उथल-पुथल चल रही है, मन में कौन सा रोग या विकार पैदा हो गया है, जिससे नींद नहीं आती है, गुस्से से किसी का गला घोंट देते हैं एवं आत्महत्या की ओर अग्रसर हो जाते हैं, को कैसे ठीक किया जाए, उनकी मनोविकृति किस तरह बदली जाए, ताकि रोगी को आराम मिल सके। बढ़ती आबादी एवं काम के बोझ से दिमागी बीमारियां, तनाव, अनिद्रा की अवस्था को दूर करने हेतु आज के समय में मनोविज्ञानी एवं मनोचिकित्सक की मांग काफी बढ़ गई है।
मनोचिकित्सक के कार्य
मनोविज्ञानी एवं मनोचिकित्सक का कार्य अलग-अलग है। मनोविज्ञानी आपके मन में चल रही दुविधाओं को दूर कर सकारात्मक सोच की ओर प्रेरित करता है तथा आपको ऐसी सलाह देता है, जिससे आप तनाव से मुक्त रहें एवं तनाव की स्थिति में क्या करना उचित है यह समझ सकें। परन्तु मनोचिकित्सक आपको मन के रोग को सही तरह से समझ कर आपको उसकी उपयुक्त दवा देता है, जो जरूरी होता है। जैसे रोगी की स्थिति घर तक रहने की है या फिर पागलखाने जाने की स्थिति है। साथ ही घोर चिंता, तनाव व अनिद्रा रोग के उपाय हेतु डिप्रेशन रोकने एवं हृदय की गति को नियंत्रित रखने हेतु कुछ नशीली दवा लिखते हैं, जो काफी सुरक्षित रहता है। जैसे डाइजेपाम, क्लोरोडाइजेपाक्साइड, फ्लूरेजेपाम, कलारेजेपाम आदि, जो नाइट्रिक ड्रग्स एवं साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज एक्ट 1985 को ध्यान में रखकर डाॅक्टर द्वारा रोगी के सही उपचार हेतु दिया जाता है।
मनोरोगी के रोग
ऐसा न करने पर मनोरोगी को हार्टअटैक, मस्तिष्कघात एवं नींद न आने से मन नहीं लगना, भूख मर जाना, घबराहट, बेचैनी से शुगर की मात्रा बढ़ना तथा वजन घटने लगता है। इसका असर शरीर के अंग जैसे लीवर, किडनी पर पड़ता है। ऐसे स्थिति में मनोचिकित्सक काफी हद तक यह कोशिश करते हैं कि रोगी का रोग आत्मविश्वास बढ़ाकर, सकारात्मक सोच, योग एवं मनोरंजन से दूर किया जाए, जो साइक्रेटिस्ट करते हैं।
मस्तिष्क और तन
दिमाग का ठीक से कार्य न करना आंतरिक अंगों का ठीक से कार्य न करना भी हो सकता है। जैसे दिमाग के अंदर लाखों नसें हैं, जिनका नियंत्रण तंत्रिका तंत्र द्वारा होता है। एक ही समय में शरीर में होने वाली कई विभिन्न क्रियाओं के बीच तालमेल स्थापित करने के लिए तंत्रिका तंत्र उत्तरदायी है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि शरीर के सभी अंग यथासंभव कुशलता से कार्य कर रहे हैं। यह शरीर के सभी चेतन और अचेतन क्रियाओं का नियंत्रण केन्द्र हैं।
इस प्रकार मनोचिकित्सक को यही ऐसा लगता है कि ब्रेन में कोई नस का संचालन नहीं हो रहा है या कोई चोट है तो वह तुरंत न्यूरोसर्जन के पास भेजता है, जहाॅं उसका इलाज सही तरीके से किया जा सकता है। मस्तिष्क वस्तुतः मानव शरीर के समस्त अवयवों में सर्वाधिक उल्लेखनीय अंग है। शरीर के सामान्य कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ मस्तिष्क मानव व्यक्तित्व, संवेगों, कुशलता, बुद्धिमत्ता और रचनात्मकता को अग्रसित करता है, जो स्मृति का आधार एवं प्रसारण केन्द्र है। यह शरीर के सभी अंगों से जुड़ा है और न सिर्फ स्मृति एवं प्रसारण केन्द्र है, बल्कि बांहों एवं टांगों की क्रियाओं में भी तालमेल स्थापित करता है।
मनोचिकित्सक की मांग
आज मनोचिकित्सक की मांग इतनी तेजी से बढ़ गई है कि सारे अस्पताल में साइकेट्री विभाग खुल गया है, जिससे रोग का सही तरीके से इलाज किया जा सके। वस्तुतः पहले इंटरमीडिएट भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान की परीक्षा उत्तीण्र कर एम.बी.बी.एस. का साढ़े पांच वर्षीय कोर्स पूरा करना होता है। उसके बाद स्पेशल विषय के रूप में साइको चिकित्सा से एमडी का दो वर्षीय पाठ्यक्रम पूरा करना होता है।
मनोचिकित्सा के क्षेत्र में पिछले कुछ सालों में गेरेंटोलाजी के क्षेत्र में जबरदस्त उछाल आया है। यह वस्तुतः ओल्डऐज ह्यूमन बिहेवियर साइकोलाजी का क्षेत्र है, जिसमें उम्र दराज लोगों का उनके मनोरोग के अनुसार दवा दी जाती है। मनोचिकित्सा ने कैरियर के तमाम रास्ते खोल दिए हैं, जिससे चाइल्ड साइको से लेकर दांपत्य जीवन में सेक्स संबंधित परेशानी को दूर किया जा सके।
साइकोथेरेपी का नया ब्रांच भी कुछ अस्पतालों में रखा गया है। जहाॅं छोटे नर्सिंग होम या अस्पताल हैं, वहाॅं पार्ट टाइम मनोचिकित्सक बैठते हैं। मनोचिकित्सक सरकारी एवं गैर सरकारी संस्था से संबंधित अस्पतालों में आवश्यक रूप से रहते हैं। बड़े पैमाने पर कई ऐसी स्वयंसेवी संस्था एवं ट्रस्ट भी हैं, जहाॅं मनोचिकित्सक भी कार्यरत रहता है। ये काउंसलिंग के क्षेत्र में भी कार्य करते हैं, जैसे कंज्यूमर बिहेवियर, साइकोलाजी एवं साक्षात्कार में उम्मीदवार की योग्यता एवं चरित्र का सही मापन करना आदि है।
यहाॅं मनोवैज्ञानिक ही विशेष रूप से कार्य करते हैं, जो सामाजिक विज्ञान एवं सामान्य विज्ञान के पारंगत/एक्सपर्ट होते हैं। पलक छपकते ही आपके स्वभाव को जान जाते हैं एवं आपके मानसिक रोग को दूर करते हैं। वे आपके क्रियाकलाप को समझकर आपके सकारात्मक सोच को आपके अंदर से निकालकर ही दम लेते हैं। इस हेतु मुॅंबई में टाटा इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंस में दो-वर्षीय डिप्लोमा कोर्स में भी ग्रेजुऐशन के बाद प्रवेश परीक्षा पास कर दाखिला ले सकते हैं।
बढ़ती खरीद-फरोख्त, उपभोक्तावाद एवं गुणवत्ता वाले प्रोडक्ट को बाजार में उतारने हेतु लोगों की मानसिकता बदलने एवं भरोसा दिलाने का कार्य भी अच्छे मनोविज्ञानी करते हैं, जिन्हें साइकोलाजिस्ट कहा जाता है।
इस तरह साइकोलाजी एवं साइकोथेरेपी दोनों आज के क्षेत्र में काफी जोरों से अस्पतालों, बिजनेस स्कूलों, स्वयंसेवी संस्थाओं में पढ़ाई एवं इलाज चल रहा है, जिसकी आने वाले दिनों में तेजी से मांग बढ़ने वाली है। किसी भी मनोचिकित्सक को कुल मिलाकर 50-70 हजार रूपए मासिक मिल जाते हैं। ये अपना निजी क्लीनिक भी खोलकर प्रेक्टिस करते हैं। कुल मिलाकर आज के बदलते तनावग्रस्त माहौल में मनोचिकित्सक एवं मनोविज्ञानी दोनों की मांग तेजी से बढ़ी है तथा रोजगार के नए-नए अवसर पैदा हुए हैं। फिलहाल आज बहुत से अस्पतालों में मनोचिकित्सकों की मांग काफी तेजी से बढ़ रही है।  मनोचिकित्सा में शिक्षण एवं महारत प्रदाय करने हेतु देश में कुछ संस्थान  निम्नानुसार हैं।
(1) आल इंडिया इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस, नई दिल्ली (2) डिपार्टमेंट आफ साइकोथेरेपी, संजय गांधी इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस, लखनऊ (3) लेडी श्रीराम मेडिकल कालेज, लाजपत नगर, नई दिल्ली-29 (4) पटना मेडिकल कालेज एंड हास्पीटल, पटना-800004 (बिहार) (5) इंद्रप्रस्थ कालेज फार वुमेन, श्यामनाथ मार्ग, दिल्ली-54 (6) लेडी हार्डिंग मेडिकल कालेज, दिल्ली-110051 (7) डिपार्टमेंट आफ साइक्रेटी, शासकीय किलपाॅक मेडिकल कालेज, चेन्नई-10, (8) संत जान मेडिकल कालेज, बंगलुरू-586005 (कर्नाटक), (9) कस्तूरबा मेडिकल कालेज, गोधन नगर, मणिपाल-576904, (10) स्वामी मानसिंह मेडिकल कालेज, जयपुर (राजस्थान), (11) जीपमेर (श्रप् च्डम्त्) पांडचेरी-615006, (12) मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन, सनवारा नगर, चेन्नई (तमिलनाडु), (13) जे.जे. हास्पीटल, डिपार्टमेंट आफ साइक्रेटी, मुॅंबई-400008 (महाराष्ट्र), (14) ग्रांट मेडिकल कालेज, शिवाजी नगर, मुॅंबई-400028 (महाराष्ट्र), (15) डिपार्टमेंटल आफ साइक्रेटी, गवर्नमेंट मेडिकल कालेज, पुणे-6 (महाराष्ट्र)
संजय गोस्वामी
यमुना जी/13, अणुशक्ति नगर, मुॅंबई-94 (महाराष्ट्र)

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