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शोध
कौन से हैं बुद्धिमत्ता के जीन
(01-02-2015)

वैज्ञानिक अब तक बुद्धिमत्ता के जीन की ठीक-ठीक तलाश नहीं कर सके हैं। शोधकर्ता 69 जींस को उच्च शैक्षिक           उपलब्धियों का कारक मान रहे हैं। प्रकृति और परिवेश भी बुद्धि से जुड़े हुए हैं। वैज्ञानिक इस ओर अभी भी जीन को तलाश नहीं सके हैं। आने वाले दिनों में बुद्धिमत्ता के जीन की पहचान सम्भव हो सकेगी।

वैज्ञानिकों ने इस बार करीब 1 लाख लोगों का अध्ययन करके तीन जेनेटिक भिन्नताओं को आईक्यू से जुड़ा पाया है, मगर व्यक्ति की बुद्धि पर इनका असर नगण्य पाया गया है। यह अध्ययन न्यूयार्क में इथाका स्थित कार्नेल विश्वविद्यालय के समाज वैज्ञानिक डेनियल बेंजामिन के नेतृत्व में किया गया।

शैक्षिक उपलब्धि के जींस

शोधकर्ताओं ने पाया कि 69 जींस उच्च शैक्षिक उपलब्धियों से जुड़े हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि इन जींस और व्यक्ति की शैक्षिक उपलब्धियों का कोई कार्य-कारण   सम्बन्ध है। मतलब सिर्फ इतना है कि ये 69 जींस और शैक्षिक उपलब्धि साथ-साथ चलते हैं। इनमें से तीन जींस का सम्बन्ध बेहतर (थोड़ी बेहतर) संज्ञान क्षमता से देखा गया।

इस तरह के अध्ययनों का एक लम्बा इतिहास रहा। बात सामान्य अवलोकन से शुरू होती है कि बुद्धिमान मां-बाप के बच्चों के बुद्धिमान होने की संभावना ज्यादा होती है। मगर इस मामले में यह ध्यान रखना आवश्यक है कि माॅं-बाप बच्चों को सिर्फ जींस नहीं देते, परवरिश भी देते हैं। यानी बहस इस बात पर है कि बुद्धि जींस से निर्धारित होती है या परवरिश से    (प्रकृति बनाम परवरिश)।

बुद्धि में जेनेटिक्स

इस समस्या को सुलझाने के लिए जुड़वां बच्चों पर कुछ अध्ययन किए गए। यह जरूरी है कि इन अध्ययनों से इतना तो लगता है कि बुद्धि में जेनेटिक्स का कुछ योगदान तो है, मगर यह स्पष्ट नहीं है कि कितना। वैसे ‘जुड़वां अध्ययनों’ पर कई सवाल भी उठते रहे हैं। इसके बाद नम्बर आया डीएनए, यानी आनुवंशिक पदार्थ में बुद्धि की तलाश का। इन अध्ययनों की पद्धतियों से तंग आकर 2012 में शोध पत्रिका बिहेवियर जेनेटिक्स ने अपने संपादकीय में लिखा था, ‘‘ऐसा लगता है कि पिछले दशक में प्रकाशित निष्कर्ष गलत या गुमराह करने वाले थे।’’

इसके बाद पद्धतियों में सुधार आया और निष्कर्षों को ज्यादा सख्त मापदंडों पर परखना शुरू हुआ। इस प्रकार का एक अध्ययन 2013 में किया गया था, जिसमें 1 लाख 26 हजार व्यक्तियों के जीनोम की तुलना की गई थी। उस अध्ययन में पहचाना गया था कि तीन जींस के विभिन्न रूपों का सह-सम्बन्ध इस बात से है कि कोई व्यक्ति स्कूलों में कितने साल अध्ययन करता है या क्या वह काॅलेज तक पहुॅंचता है। मगर यह सम्बन्ध नगण्य ही था। और यह तो सब जानते हैं कि स्कूल जाना-न-जाना, काॅलेज में पहुॅंचना-न-पहुॅंचना काफी हद तक परिवार की सामाजिक-आर्थिक स्थिति से तय होता है। और स्कूल-कालेज में उपस्थिति का बुद्धि से सम्बन्ध तो और भी शंकास्पद है।

आई क्यू और जींस

लिहाजा आईक्यू और जींस का सम्बन्ध देखने के लिए एक और  अध्ययन किया गया। इस बार शोधकर्ताओं ने 69 ऐसे जीन रूप पहचाने, जिनका सम्बन्ध शैक्षिक स्तर से दिख रहा था। इनका सम्बन्ध उन व्यक्तियों के आईक्यू प्रदर्शन से देखने की कोशिश की गई। 

24000 व्यक्तियों के इस अध्ययन में देखा गया कि तीन जीन रूप व्यक्ति के शैक्षणिक स्तर और आईक्यू दोनों से सम्बन्ध रखते हैं। मगर इन जीन रूपों की उपस्थिति और अनुपस्थिति से आईक्यू स्कोर में मात्र 0.3 अंकों का असर पड़ता है। यानी किसी व्यक्ति में यदि इन तीनों जीन के सही रूप मौजूद हों तो उसका आईक्यू करीब 2 अंक बढ़ जाएगा।

यह तो कोई बड़ी बात नहीं है। इसलिए बेंजामिन का कहना है कि अब उन्हें यही अध्ययन 10 लाख लोगों पर करना होगा। तभी वे कुछ निश्चित तौर पर कह सकेंगे। अन्य वैज्ञानिकों का मत है कि यह असर इतना कम है कि इसमें मिथ्या परिणाम मिलने की संभावना बहुत अधिक है। शायद उन कारकों पर ध्यान देना बेहतर होगा, जिनके असर ज्यादा स्पष्ट हैं- जैसे पोषण का स्तर, शिक्षा के अवसर वगैरह।

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