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प्रकृति संरक्षण को समर्पित एकमात्र पत्रिका आम आदमी की भाषा में
प्रदूषण प्रभाव
जलवायु परिवर्तन की भेंट देश के 122 जिले
(01-02-2015)

ग्लोबल वार्मिग के बढ़ते संकट से हम जितने अनजान हैं, खतरा उससे कहीं अधिक भयावह है। पृथ्वी पर बढ़ते तापमान से अनेक पर्यावरणीय संकट दुनिया के सामने आने लगे हैं। पृथ्वी शिखर सम्मेलन क्योटो में विश्व के अधिकांश देशों ने बढ़ते तापमान को रोकने के लिए वैश्विक सहमति पर हस्ताक्षर तो किए, मगर अफसोस कि धरती का तापमान बढ़ाने वाली ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी नहीं की।

संकट में 122 जिले

जलवायु परिवर्तन खतरा अब उठ खड़ा हुआ है। दुनिया भर में इस खतरे को लेकर आशंकाएं जताई जा रही हैं, जिसके मद्देनजर भारत में कहीं और भी अधिक भयावह तस्वीर उभरने लगी है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने आशंका प्रकट की है कि देश के 122 जिलों में जलवायु परिवर्तन के परिणाम अत्यंत खतरनाक हो सकते हैं। भारत के इन 122 जिलों में 4.6 करोड़ हेक्टेयर जमीन पर खेती होती है। इन जिलों की खेती-बाड़ी जलवायु परिवर्तन के चलते बुरी तरह प्रभावित होगी।

कृषि पर दुष्प्रभाव

पेरू की राजधानी लीमा में जलवायु परिवर्तन को लेकर विश्व भर के नीति-निर्माताओं ने विचार-विमर्श किया। ठीक इसके बाद देश की संसद में केन्द्र सरकार ने एक दस्तावेज प्रस्तुत किया। दस्तावेज में कहा गया है कि भारत में 4.6 करोड़ हेक्टेयर कृषि भूमि जलवायु परिवर्तन की भेंट चढ़ सकती है। आईसीएआर के  अध्ययन में कहा गया है कि देश में 8.13 करोड़ हेक्टेयर कृषि भूमि ऐसी है, जो शुष्क या अर्धशुष्क है। ऐसी भूमि 11 राज्यों के 122 जिलों में फैली है। बदलती जलवायु का सर्वाधिक दुष्प्रभाव इस भूमि पर पड़ रहा है।

भारत में जलवायु परिवर्तन के कारण सर्वाधिक संकट राजस्थान में नजर आएगा। राजस्थान के 32 जिले की खेती-किसानी चैपट होने की आशंका है। इसके बाद दूसरे प्रभावित होने वाले राज्यों में मध्यप्रदेश, कर्नाटक और गुजरात शामिल हैं। मध्यप्रदेश के 22 जिले, कर्नाटक के 19 जिले एवं गुजरात के 18 जिले की कृषि भूमि पर संकट गहराएगा। उत्तरप्रदेश और बिहार के तीन-तीन जिले जलवायु परिवर्तन की चपेट में आएंगे। 

ऐसे दिखेगा परिवर्तन

जलवायु परिवर्तन खेती के लिए खतरा बन चुका है। भारत के 122 जिलों में फसल सीजन के दौरान अनिश्चित और अनियमित वर्षा होगी, जहां मानसून समय पर दस्तक नहीं देगा। खेती-किसानी के लिए जरूरत की वर्षा नहीं होने से सूखा पड़ेगा। 122 जिलों में कहीं-कहीं अचानक अत्यधिक वर्षा का कहर टूट सकता है। फसलों के समय प्रतिकूल मौसमी घटनाओं में इजाफा होगा। कहीं ज्यादा गर्मी पड़ेगी और बेमौसम गर्मी शुरू हो जाएगी। मौसम की प्रतिकूलता के चलते खाद्यान्न फसलें प्रभावित होंगी।

वैश्विक जलवायु परिवर्तन का ज्यादा खतरा अभी जहाॅं पड़ रहा है, 2020 के आते-आते संकट गहराता जाएगा। इस दुष्प्रभाव के कारण गेंहू, चावल और मक्का की पैदावार में 4 से 18 फीसदी तक गिरावट शुरू हो जाएगी।

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