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प्रकृति संरक्षण को समर्पित एकमात्र पत्रिका आम आदमी की भाषा में
कैंसर के विरूद्ध युद्ध
मुख कैंसर की भयावह स्थिति
(01-09-2014)

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री एस. गांधी सेल्वन ने 2014 में संसद में तंबाकू के सेवन से मरने वालों का जो आंकड़ा पेश किया, वह बेहद चैंकाने वाला है। उन्होंने बताया कि दुनियाभर में हर साल तंबाकू की वजह से 50 लाख लोग अपनी जिंदगी से हाथ धो बैठते हैं तंबाकू से होने वाली बीमारियों के संदर्भ में डेंटल कालेज इंदौर में पदस्थ वरिष्ठ प्रोफेसर डाॅ. सुरेन्द्र दिल्लीवाल से एक साक्षात्कार में विस्तार से चर्चा हुई।

हाल ही में चार देशों की यात्रा से लौटे डाॅ. दिल्लीवाल ने बताया कि मैं 1973 से इंदौर डेंटल कालेज में हूॅं और विदेशों में जो हालात देखे, उसके मुकाबले भारत में मुख कैंसर की स्थिति बहुत भयावह है। जो लोग नियमित रूप से तंबाकू और अन्य पान मसालों का उपयोग कर रहे हैं, वे नहीं जानते कि किस जानलेवा बीमारी को न्यौता दे रहे हैं।

बढ़ते मुॅंह के रोग

डाॅ. दिल्लीवाल के मुताबिक दांतों की बीमारियों का जो प्रकोप आजादी के बाद के समय 40 से 60 प्रतिशत था, वह आज 90 से 95 प्रतिशत तक पहुॅंच गया है। देश में बहुत सारे डेंटल कालेज खुल चुके हैं  और लोगों में अवेयरनेस भी पहले से ज्यादा हो गई है, किन्तु फिर भी डेंटल अवेयरनेस के बेसिक एजूकेशन की भारी कमी है। इसकी मुख्य वजह खाने-पीने की आदतों में परिवर्तन होना है। डिब्बाबंद भोजन, तंबाकू का प्रचलन, पाउच और विभिन्न तरीके से तंबाकू की जो वैरायटी मिल रही है, उससे नई युवा पीढ़ी ज्यादा ग्रसित है।

उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा चिंता का विषय इनके सेवन के बाद मुॅंह का कैंसर होना है। जब हम डेंटल की पढ़ाई करते थे, तब हमारे प्रोफेसर हमें चित्र लाकर दिखाते थे कि यह मुॅंह के कैंसर का रोगी है, देख लो, इस प्रकार का कैंसर का मरीज होता है। यह बात 70 से 80 के दशक के बीच की है। तब मुख कैंसर का प्रतिशत बहुत कम रहा करता था। लेकिन आज हालात बहुत बदल गए हैं। स्थिति यह है कि अकेले इंदौर के डेंटल कालेज में प्रायमरी से लेकर आखिरी स्टेज तक प्रतिदिन औसतन 8 से 10 मरीज आ रहे हैं। इनमें से 4 प्रतिशत मरीज मुख कैंसर के होते हैं।

मुख कैंसर के प्रमुख कारण

तंबाकू और पान-मसाले विभिन्न केमिकल मिले होते हैं, उससे मुॅंह के भीतर की स्थिति विकट होती चली जाती है। पहली स्टेज में फाइब्रोसिस का शिकार हो जाता है। यह स्थिति प्री-कैंसर की होती है। इस स्थिति में मरीज का उपचार और निदान सम्भव है। फाइब्रोसिस के लक्षण यह होते हैं कि मुॅंह के भीतर कुछ सफेद स्पाट आ जाते हैं या मुॅंह में जलन होने लगती है। ऐसे में जरूरी यह है कि सबसे पहले मरीज तंबाकू खाना बंद कर दें।

आखिरी स्टेज के मरीज

शरीर की दूसरी बीमारियों के उपचार के लिए तो आदमी डाक्टर के पास चला जाता है, लेकिन मुंह की रक्षा और इलाज के लिए अधिक गंभीरता नहीं बरती जाती। मैं देखता हूं कि कैंसर से ग्रसित होने के बाद ही लोग हमारे पास आते हैं। मैंने देखा है कि प्रायमरी स्टेज पर अपनी जांच करवाने के लिए आने वाले लोगों का प्रतिशत एक या दो ही है। मेरी पहली सलाह यह है कि तंबाकू तत्काल छोड़ दें। जो लोग तंबाकू खाते हैं, वे अपना नियमित चैकअप करवाएं कि कहीं वे बीमारी से ग्रसित तो नहीं हो गए हैं?

खर्चीला आपरेशन

डा. सुरेन्द्र ने कहा मैं तंबाकू खाने वालों को साफतौर पर बताना चाहता हूॅं कि मुख कैंसर का आपरेश नबहुत खर्चीला होता है। यहां तक कि एक सरकारी अस्पताल में भी इसका खर्च काफी अधिक है। इसके आपरेशन में एक लाख रूपए से ज्यादा तो लगने ही हैं, क्योंकि रेडियेशन होगा। बीमारी के दूसरे खर्चे जैसे कीमोथेरेपी आदि में काफी ज्यादा पैसा खर्च होता है। यहां तक कि मुख कैंसर का आपरेशन के बाद भी यह शंका बनी रहती है कि यह बीमारी फिर से उभर नहीं आए। आपरेशन के बाद मरीज का चेहरा बिगड़ सकता है।

मुख कैंसर पर रोक

उन्होंने कहा सवाल ये नहीं है कि हम इसे रोक नहीं सकते। इसके लिए सबसे बड़ी कमजोरी अज्ञानता का होना है, क्योंकि मरीज जब हमारे पास आता है तो वह कहता है कि मुझे तो मालूम ही नहीं कि मुख में कैंसर हो गया है। यह जरूरी नहीं कि तंबाकू खाने वाले हर आदमी को कैंसर हो जाए, लेकिन खाने वाले का प्रतिशत काफी ज्यादा है। कई बार खाने वाले टिशू का रजिस्टेंस इतना अधिक होता है कि उसे इसका असर ही नहीं होता।

बचने के उपाय

मुख कैंसर के संभावित खतरे से बचने के उपाय का सबसे अच्छा उपाय यही है कि इसका सेवन तुरंत बंद कर दें। इसके बावजूद सेवन जारी रहता है तो आप अपना नियमित चैकअप करवाएं और डाक्टर की सलाह लें। यह जीवन अमूल्य है और आपकी जिंदगी परिवर के लिए एक सम्पत्ति है।

खुद जागरूक बने

उन्होंने कहा हम चाहते हैं, अब एक ऐसी मुहिम चलाई जाए, जिसमें हर आदमी खुद अपने मुंह का परीक्षण कर लें कि यह बीमारी उसे लग तो नहीं गई है। देश में डाक्टरों की कमी, इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण मुख कैंसर से मरने वालों की संख्या बढ़ती ही चली जा रही है और इसके कारण परिवार को हानि होती है।

शहरों में इस प्रकार का एक कैंपेन चलाया जाए, जिसमें मास जागरूकता हो। हमारी कोशिश यह भी है कि हमारे अभियान में  सामाजिक संस्थाएॅं और मीडिया भी जुड़े। वृहद रूप से इसका प्रचार-प्रसार किया जा सके, क्योंकि सबके पास मुंह है, सबके पास दांत हैं और सबका जीवन है। हमारा सबका लक्ष्य हो कि सबका जीवन स्वस्थ रहे। किसी भी किताब में यह नहीं लिखा होता कि उम्र बढ़ने के साथ दांत भी आपका साथ छोड़ देते हैं। दांत पूरे जीवनभर आपका साथ निभाने को तैयार हैं, बशर्ते आप उन्हें तंबाकू और उससे संबंधित प्रचलन में चल रहे पान मसालों से बचाकर रखें।

कैसे जांच करें

अनोखेलाल उस दिन सकते में आ गया जब किसी ने उसे बताया कि जबान पर न भरने वाला छाला कैंसर का हो सकता है। उसकी आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा। जैसे-तैसे अनोखेलाल ने खुद को संभाला और अपना मुंह खोलकर उस छाले की तरफ देखा, जो उसे 15 दिन से बिना किसी दर्द के वहां मौजूद था। उस दिन से आज तक उसने तम्बाकू न चबाने की कसम खा ली। और तो और पाउच व सुपारी तक खाना बंद कर दिया। आखिर अनोखेलाल को क्या हुआ था?

अनोखेलाल को जो छाला हुआ था, वह कैंसर में तब्दील हो सकता था। अनोखेलाल की तरह आप खुद भी अपने मुंह की जांच कर सकते हैं और मुख कैंसर के संभावित खतरे से खुद को बचा सकते हैं।

क्या देखें 

(1) क्या आपका मुॅंह खुलना कम हो गया है? (2) क्या आपको कोई छाला या घाव है जो भरता नहीं है? (3) क्या आपको जीभ या गले में सफेद या लाल दाग है? (4) क्या आपके मसूढ़ों में असामान्य सूजन रहती है? (5) क्या आपको कोई गठान या कड़कपन महसूस होता है? (6) क्या आपकी जीभ बाहर निकलना कम हो गई है?स

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