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स्वास्थ्य
जिंदगी से मिठास छीनता डायबिटीज
(01-11-2014)

जिन लोगों को डायबिटीज हो जाती है, उन्हें हमेशा डर बना रहता है कि अब जिंदगी में मिठास नहीं है, जबकि हकीकत तो यह है कि डायबिटीज का होना आपको जीवन के प्रति सचेत कर रहा है कि आप अब तक केयरलैस जीवन जी रहे हैं। अब बारी है जागरूकता के साथ जीने की। 

डायबिटीज मात्र इंसुलिन हार्मोन की कमी के कारण पैदा हुआ रोग है। इंसुलिन का निर्माण शरीर की पेन्क्रियाज ग्रंथि द्वारा किया जाता है। हम जो भोजन करते हैं, वह शरीर में विभिन्न प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद ग्लूकोज में बदल जाता है, जो कि शरीर में ऊर्जा के रूप में कार्य करता है। जब रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है तो पेन्क्रियाज द्वारा स्रावित इंसुलिन हार्मोन ग्लूकोज स्तर को नियंत्रित रखता है। जब इंसुलिन स्रावण की मात्रा में व्यवधान आ जाता है तो रक्त में ग्लूकोज का स्तर अधिक होने की वजह से डायबिटीज हो जाती है।

लक्षण

किसी भी लक्षण को पूरी तरह डायबिटीज के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। फिर भी निम्न लक्षण स्पष्ट हो सकते हैं- पेशाब का बार-बार आना, बहुत प्यास लगना, मुॅंह सूखना, थकान व शिथिलता, आंखों में जलन व चुभन, शरीर में खुजली, वजन कम होना, भूख अधिक लगना, पेशाब पर चींटी हो जाना और किसी घाव का शीघ्र न भरना।

उपचार

व्यवस्थित जीवनशैली अपनाकर डायबिटीज को नियंत्रित रखा जा सकता है, जिससे कि जीवन भर दवाओं की आवश्यकता नहीं पड़े। अब तक के सर्वेक्षण द्वारा सिद्ध हो चुका है कि दवाओं के साथ भी यदि जीवनशैली व्यवस्थित नहीं है, तो यह रोग अन्य रोगों को जन्म देता है। हर हालत में जीवनशैली में बदलाव कर डायबिटीज जैसे रोग पर काबू पाया जा सकता है।

ऐसा माना जाता है कि सब रोगों की शुरूआत पेट से ही होती है, अतः प्राकृतिक चिकित्सा की विधियों द्वारा पेट को साफ रखें। पेट पर प्रतिदिन 30 मिनट तक मिट्टी की पट्टी व 10 मिनट गर्म सेंक लें।

आसन एवं यौगिक क्रियाएॅं

इन आसनों नियमित करें। बकासन, कपालभाति, अर्धमत्स्येन्द्रासन,  चक्रासन, श्वासन, नौकासान, कपालभाति, नाड़ीशोधन, उड्डयान बंध, मूलबंध एवं 3-4 किलोमीटर घूमना।

आहार में ऐसे खाद्य पदार्थों का चयन करना होगा, जिनसे शरीर, पेन्क्रियाज व बीटा सैल्स सक्रिय होते हों, जिससे इंसुलिन निर्माण सहायता मिलती हो। जैसे पत्तागोभी, फीका दूध, मौसम के खट्टे फल, करेला, खीरा, लौकी, जामुन, अमरूद, फालसा, तुरई, भिण्डी, सिंघाड़ा, जौ, ज्वार, चने की रोटी आदि। एक स्वस्थ व्यक्ति का वजन 70 किलोग्राम के आसपास है। उसके पेन्क्रियाज से 35 यूनिट इंसुलिन बनता है। जब यह निष्क्रिय हो जाते हैं, तब उसकी पूर्ति हेतु ऊपर से इंसुलिन उसी कम हुई मात्रा के अनुपात में लेना पड़ता है। व्यक्ति स्वस्थ हो या डायबिटिक उसे हर हाल में ऐसा आहार व व्यायाम करना ही चाहिए, जिससे इंसुलिन अधिक से अधिक प्राप्त हो सके।

जटिलताएॅं

डायबिटीज के रोगियों को अन्य व्यक्तियों की तुलना में शीघ्र अन्य जटिल रोग होने की अधिक संभावनाएॅं रहती हैं। रोग होने पर शरीर व आहार के प्रति जागरूक रहकर अपनी जीवन शक्ति को बढ़ाना होगा, ताकि अन्य रोग आक्रमण ही न कर पाएं। इसके लिए समय-समय पर खून-पेशाब की जांच के साथ-साथ सेक्स का भरपूर आनंद भी लेना चाहिए, ताकि आस्ट्रोडियोल हार्मोन का स्रावण हो सके। डायबिटीज में आस्ट्रोडियोल हार्मोन की कमी के कारण सेक्स के प्रति अरूचि व आत्मविश्वास में कमी आती है। जब आप खुले मन से सेक्स करते हैं तो आस्ट्रोडियोल हार्मोन तेजी से स्रावित होता है, फलस्वरूप आप में जोश, स्फूर्ति आने लगती है और आप मधुमेह का विकार होते हुए भी प्रसन्न नजर आते हैं।

 डाॅ. वीरेन्द्र अग्रवाल

स्वास्थ्य मंदिर, नेचुरोपैथी सेंटर, ई-164, रंजीत नगर, भरतपुर (राज.) 

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