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प्रकृति संरक्षण को समर्पित एकमात्र पत्रिका आम आदमी की भाषा में
ऊर्जा संरक्षण
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भारत में विद्युत उत्पादन

01-08-2015

ऊर्जा के मामले में भारत विश्व के दूसरे देशों से काफी पिछड़ा है। एक वैज्ञानिक अनुमान के अनुसार साधारण जीवनयापन के लिए लगभग 1840 यूनिट प्रति व्यक्ति/वर्ष बिजली की आवश्यकता पड़ती है। जबकि, बेहतर जीवनयापन के लिए 4000 यूनिट बिजली की जरूरत होती है। 125 करोड़ जनसंख्या वाले भारत देश में लगभग 2300 अरब यूनिट बिजली प्रतिवर्ष की आवश्यकता है। वर्तमान भारत में बिजली उत्पादन की कुल स्थापित क्षमता 256020 मेगावाॅट है।

भारत में प्रति व्यक्ति विद्युत खपत लगभग 900 यूनिट प्रतिवर्ष है। विश...

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मरूथल में अपारम्परिक ऊर्जा स्रोत

01-03-2015

विद्युत उत्पादन और उसे दूरस्थ क्षेत्रों में पहुॅंचाना कठिन होता है। मरूस्थलीय क्षेत्रों में सौर ऊर्जा तकनीक को सुलभ बनाने की और अधिक आवश्यकता है। सौर ऊर्जा से सबको हर समय सस्ती, प्रदूषण रहित बिजली मिल सकेगी।


शुष्क क्षेत्रों की विषम परिस्थितियों के कारण यहां ऊर्जा के व्यवस्थित उपयोग का विशेष महत्व है। इन क्षेत्रों में जल विद्युत नहीं है। बिजली की उपलब्धता अनिश्चित है। दूर-दराज के गांवों में ईंधन पहुॅंचाना कठिन है।
किसान और विद्युत
बिजली के ...

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सौर ऊर्जा का बेहतर माॅडल

01-08-2014

देश में बिजली की मांग तेजी से बढ़ती जा रही है। इस वृद्धि में प्रमुख योगदान तो शहरों का है, परन्तु अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में देश के समक्ष एक बड़ा प्रश्न यह है कि बिजली की तेजी से बढ़ती मांग की पूर्ति कैसे की जाए?

प्रारंभ में सरकार ने नदी घाटी योजनाओं के माध्यम से बिजली की आपूर्ति बढ़ाने का प्रयास किया। किन्तु, कुछ समय बाद ही बिजली की मांग आपूर्ति की अपेक्षा अधिक हो गई। मगर नदी घाटी योजनाओं के कारण आबादी के विस्थापन आदि के...

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इथेनाॅल: एक आदर्श ईंधन

01-07-2014

आज विश्व जिन दो-चार संकटों से सर्वाधिक त्रस्त है, उनमें से एक है ऊर्जा संकट। ऊर्जा की मांग विकास का पैमाना बन चुकी है। कहना न होगा कि इसीलिए प्रति व्यक्ति ऊर्जा उपभोग भारत की अपेक्षा अमेरिका में पन्द्रह गुणा अधिक है। स्वाभाविक है कि वैज्ञानिक ऊर्जा के लिए केवल पेट्रोलियम तथा कोयले पर निर्भर रहना नहीं चाहते, जिसके कारण वे वैकल्पिक स्रोतों पर भी गंभीरता से विचार करने लग गए हैं। इस दृष्टि से इथेनाॅल (एथिल एल्कोहाॅल) एक आदर्श विकल्प बन कर उभरा है।

जैव ईं...

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बायोगैस: पर्यावरण हितैषी ऊर्जा

01-06-2014

किसी भी देश में आर्थिक व सामाजिक विकास के लिए ऊर्जा आधारभूत आवश्यकता है। भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रत्येक क्षेत्र जैसे कृषि, उद्योग, परिवहन, घरेलू व रक्षा के विकास के लिए भी ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है। इस कारण से ऊर्जा की विभिन्न रूपों में मांग लगातार बढ़ती जा रही है। 

सौर ऊर्जा की बढ़ती हुई मांग को पूरा करने में देश की निर्भरता खनिज तेल, कोयला एवं गैस पर निरंतर बढ़ती जा रही है। उपरोक्त ऊर्जा स्रोतों की देश में बहुत कम उपलब्धता एवं उत्पादन होने के कारण इसका 8...

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भारत के समाचार पत्रों के पंजीयक कार्यालय की पंजीयन संख्या( आर. एन. आर्इ. नं.) : 7087498, डाक पंजीयन : छ.ग./ रायपुर संभाग / 26 / 2012-14
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