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प्रकृति संरक्षण को समर्पित एकमात्र पत्रिका आम आदमी की भाषा में
आवरण आलेख
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उज्ज्वला योजना में भारत का उज्ज्वल भविष्य

01-10-2017

भारत की लगभग 40 फीसदी आबादी इतनी गरीब है कि वह रसोई गैस नहीं खरीद सकती। शहर व गांवों में रहने वाले करीब 40 करोड़ लोगों के परिवार को भोजन बनाने के लिए लकड़ी या कोयले की जरूरत रोज होती है। ऐसे गरीब परिवारों को लकड़ी मुहैया करवाने के लिए पेड़ लगातार काटे जा रहे हैं। ग्रामीण इलाकों के अधिकांश पेड़ ईंधन के लिए कट जाते हैं। शहरी क्षेत्र के परिवार भी गांवों पर आश्रित होते हैं, जहाॅं के छोटे-छोटे बाजार में लकड़ियां लाई जाती हैं। घुमन्तु जीवन व्यतीत करने वाले, झुग्गी झोपड़ी मे...

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जल आज और कल के लिए

01-03-2015

पानी निर्मल हो नदियों में गंदगी न दिखे। अस्तित्व में रहते हुए तालाब जनजीवन को सहेजे। वर्षा के अनमोल जल का हम सब सदुपयोग करें। ‘मनसा वाचा कर्मणा’ से धरती का जल बचा रहेगा, जिससे इंसान ही हर जीव-जंतु की प्यास बुझा सकेगा। पानी कमी, जल प्रदूषण, असमान वितरण के कारण हो रही है, इसे जानें और समझें।

आज पूरा देश पीने के पानी की कमी और प्रदूषित पानी के खतरे से जूझ रहा है। सर्वाधिक खतरा प्रदूषित पानी से है। ऐसे जल के सेवन से अनेक रोग फैल रहे हैं। पानी के प्रति हमारी स...

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विनाश रचता हमारा विकास

01-02-2015

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम।। परित्राणाय साधुनाम विनाशाय च दुष्कृताम। धर्मं संस्थापनाथाय सम्भावामी युगे युगे।।

अर्थात्- हे भारत ! जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब मैं अपने रूप का सृजन करता हूँ अर्थात साकार रूप से लोगों के समक्ष प्रकट होता हूँ। 

साधुजनों का उद्धार करने के लिए, पापकर्म करने वालों का विनाश करने के लिए और धर्म की अच्छी तरह से स्थापना करने के लिए मैं युग-युग में प्र...

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लीमा में मौसम परिवर्तन पर "COP-20" राष्ट्र प्रतिनिधियों की बैठक

01-01-2015

प्रत्येक नागरिक तक इस वैश्विक चिंतन की बात को अवश्य पहुॅंचाना चाहिए कि हम इस विकास की डगर पर किस खतरनाक रास्ते पर पहुॅंच चुके हैं तथा प्रत्येक नागरिक से, विश्व समुदाय से क्या अपेक्षा है। हम अपेक्षा करते हैं कि मार्च 2015 में पेरिस में आहूत अगला अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ठोस एवं सकारात्मक परिणितियों के साथ संपादित होगा।

पेरू की राजधानी लीमा में दिसम्बर 01 से दिसम्बर 12 के बीच भूमंडलीय मौसम परिवर्तन से लड़ने हेतु प्रोटोकाल/कन्वेंशन में सभी 195 शामिल राष्ट्रों क...

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हरित क्रांति में पंजाब कंगाल

01-12-2014

20वीं सदी में हमने विकास की जो इबारतें लिखीं, उस पर आज हमको अफसोस हो रहा है कि काश हम ऐसा न करते। सबसे अहम् प्रकृति, पर्यावरण के विरूद्ध कार्य को अंजाम देने युद्ध में जीत की लिप्सा लिए परमाणु बम बनाने तो परमाणु विद्युत संयंत्र तो जीते-जागते बम बन चुके हैं। 1984 में भोपाल गैस त्रासदी ऐसे ही क्रूरतम विकास का अंजाम है। प्रकृति विनाश से आदमी अकाल मौत मरने को अभिशप्त हो गया है। वहीं लाइलाज रोग को ढोते हुए जिंदगी को काटने के लिए मजबूर है। हरित क्रांति ने हमारी जो दुर्द...

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भारत के समाचार पत्रों के पंजीयक कार्यालय की पंजीयन संख्या( आर. एन. आर्इ. नं.) : 7087498, डाक पंजीयन : छ.ग./ रायपुर संभाग / 26 / 2012-14
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