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प्रकृति संरक्षण को समर्पित एकमात्र पत्रिका आम आदमी की भाषा में
औषधीय सम्पदा
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संकटग्रस्त है बहुमूल्य औषधि सर्पगंधा

01-03-2015

भारतीय चिकित्सा विज्ञान के प्राचीन ग्रंथों चरक संहिता तथा सुश्रुत संहिता में सर्पगंधा का औषधीय गुणों के कारण खुब गुणगान किया गया है। सर्पदंश तथा कीटदंश के उपचार में इसे अत्यन्त ही लाभकारी बताया गया है। सर्पगंधा का वानस्पतिक नाम रावोल्फिया सर्पेन्टीना (त्ंनअवसपिं ेमतचमदजपदं) है। यह पुष्पीय पौधों के द्विबीजपत्रीय कुल एपोसाइनेसी (।चवबलदंबमंम) का सदस्य है। अंग्रेजी में इसे सर्पेन्टीन (ैमतचमदजपदम) तथा स्नेक रूट (ैदंाम तववज) नामों से जाना जाता है। सर्पग...

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नीम हकीम नहीं है नीम

01-03-2015

नीम का वृक्ष अनेक गुणों को समेटे हुए होता है। खेती-किसानी के साथ मानव के लिए भी बहु-उपयोगी साबित हुआ है। प्राचीन भारत में नीम के जिस महत्व को रेखांकित किया गया था, उस ज्ञान पर हमारे कृषि वैज्ञानिकों ने ध्यान नहीं दिया। अगर समय रहते नीम अनुसंधान को व्यावहारिक तौर पर लागू किया जाए तो रसायनों से बंजर होती हमारी कृषि भूमि फिर से हरी-भरी हो जाएगी।


नीम (एजाडिरेक्टा इंडिका) भारतीय मूल का एक सदाबहार वृक्ष है, जो पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार (बर्मा), था...

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नीम जो खुद हकीम भी है

01-09-2014

नीम भारतीय मूल का एक सदाबहार वृक्ष है। इसका वानस्पतिक नाम डमसपं ं्रंकपतंबीजं अथवा ।्रंकपतंबजं पदकपबं है। नीम एक तेजी से बढ़ने वाला पेड़ है जो 15-20 मीटर (लगभग 50-65 फुट) की ऊॅंचाई तक पहुॅंच सकता है। तना अपेक्षाकृत सीधा और छोटा होता है और व्यास में 1.2 मीटर तक पहुॅंच सकता है। इसकी छाल कठोर, विदरित (दरार युक्त) या शल्कीय होती है। फूल सफेद और सुगंधित होते हैं  और एक  लटकते हुए पुष्पगच्छ जो लगभग 25 सेंटीमीटर (10 इंच) तक लम्बा होता है। इसका फल चिकना (अरोमिल) गोलाकार से अंडाकार ...

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अनार

01-07-2014

अनार को संस्कृत में दाड़िम, गुजराती में दाड़म, मराठी में डालिब, बंगाली में अनार, तमिल में मथुलई, तेलगू में दाडिम्म, कन्नड़ में दाडिम्बे, मलयालम में थलीमाथेलम, अंग्रेजी में Pomegramate तथा लेटिन में Punica Granatum कहते हैं।

परिचय

अनार में 3 जाति हैं। मीठे, खट्टे-मीठे और खट्टे फलवाली। अन्य प्रकार से अनार की 2 जाति हैं। एक जाति में केवल फूल आते हैं। दूसरी में फूल और फल दोनों होते हैं। अनार की छाल में से रंग निकलता है, वह कपड़े रंगने में काम आता है। अनार के फल के छिलके, दाने, फ...

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रूद्राक्ष धार्मिक एवं औषधीय वृक्ष

01-03-2014

रूद्राक्ष दो शब्दों  रूद्र और अक्ष यानी शंकर की आॅंख से गिरी जलबिन्दु से रूद्राक्ष की उत्पत्ति हुई है। शिव पुराण के अनुसार संसार की कल्याण कामना के लिए भगवान शिव ने हजारों वर्ष तपस्या की। उस समय उन्हें भय सा लगा और उन्होंने अनायास ही नेत्र खोले। तभी एक बूंद अश्रु गिरी तथा इसी बीज रूपी अश्रु से रूद्राक्ष का पेड़ पनप उठा। लोक कल्याण की भावना से भगवान शंकर के अंश से उत्पन्न यह परम श्रेष्ठ फल शंकर को बहुत प्रिय हैए अतः रूद्राक्ष की माला भगवान शंकर की पूजा में अ...

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भारत के समाचार पत्रों के पंजीयक कार्यालय की पंजीयन संख्या( आर. एन. आर्इ. नं.) : 7087498, डाक पंजीयन : छ.ग./ रायपुर संभाग / 26 / 2012-14
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स्वामित्व, मुद्रक एवं प्रकाषक : एनवायरमेंट एनर्जी फाउडेषन, 28 कालेज रोड, चौबे कालोनी, रायपुर (छ.ग.) के स्वामित्व में प्रकाषित, महावीर आफसेट प्रिंटर्स, रायपुर से मुदि्रत, संपादक - ललित कुमार सिंघानिया, 205, समता कालोनी, रायपुर रायपुर (छ.ग.)

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