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प्रकृति संरक्षण को समर्पित एकमात्र पत्रिका आम आदमी की भाषा में
पर्यावरण संरक्षण
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कृषि में गोमूत्र और गोबर का महत्व

01-03-2015

रासायनिक खेती के खतरों को हम अब जान चुके हैं। भूमि का बंजर होना, खाद्यान्नों का विषाक्त होने के साथ जल प्रदूषण और जैव विविधता संपदा के नष्ट होने में कृषि रसायनों का उपयोग है। इन सारे दुष्प्रभाव को दूर करने के लिए कृषि में गोबर और गौमूत्र का इस्तेमाल करके नियंत्रण पाया जा सकता है।


भारत में और भारत के अतिरिक्त अन्य देशों में गाय का महत्व मुख्य रूप से दूध और दूध से बने अन्य व्यंजनों के लिए किया जाता है। किन्तु, गाय के मूत्र और गोबर का महत्व कुछ कम नहीं है। ...

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गाय से श्वेत कुष्ठ का इलाज

01-03-2015

वैद्यक चिकित्सा पद्धति भारतीय चिकित्सा पद्धति की प्राचीन चिकित्सा पद्धति है। अंग्रेजी दवाओं के कारण यह चिकित्सा पद्धति कुछ पिछड़ सी गई थी, किन्तु अब पुनः लोग इसके महत्व को समझने लगे हैं। वैद्यक चिकित्सा पद्धति की पुरानी पुस्तकों में त्वचा पर सफेद धब्बों को श्वेत कुष्ठ की संज्ञा दी गई है। किन्तु आनुवंशिक विज्ञान (जेनेटिक्स) में हुए शोधकार्यों से श्वेत कुष्ठ के सम्बन्ध में जो वैज्ञानिक तथ्य उभर कर सामने आया है, वह यह कि श्वेत कुष्ठ आनुवंशिक रोग है। त्वचा ...

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प्रकृति की उदारता अधिकार नहीं

01-03-2015

जलवायु परिवर्तन के दौर से अनेक बदलाव हो रहे हैं। अनेक जीव वनस्पतियाॅं खत्म हो रही हैं। मानव जीवन में सहजता नहीं रह गई है, क्योंकि प्राकृतिक आपदाएं बढ़ गई हैं। प्रकृति पर     अधिकार करके मानव ने जिस तरह विकास किया, वहीं आज उसके लिए आत्मघाती सिद्ध हो रहा है। समय अभी भी है कि हम बची हुई प्रकृति को सहेज लें, ताकि आने वाला भविष्य और ज्यादा भयावह न हो जाए।


पिछले करीब 200 वर्षों का इतिहास मनुष्य द्वारा प्रकृति पर विजय प्राप्त करने के अधिकार का इतिहास है। इस ...

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साइटोनेमीन: पर्यावरण संरक्षक

01-02-2015

पृथ्वी की उत्पत्ति 3.5 खरब वर्ष पूर्व हुई थी। शुरूआती वातावरण आक्सीजन रहित था एवं वायुमंडल भी मौजूद नहीं था। अतः धरा लगातार पराबैगनी विकिरण के सम्पर्क में थी। 2.2 खरब वर्ष पूर्व नील हरित शैवालों का पदार्पण हुआ और उन्हीं के द्वारा सर्वप्रथम प्रकाश संश्लेषण की शुरूआत हुई। पराबैगनी विकिरण से बचाव हेतु एवं अपने उत्तरजीविता के लिए नील हरित शैवालों ने अनेक प्रकार के बचाव पद्धतियों को विकसित किया।    धीरे-धीरे वायुमंडल का निर्माण हुआ। प्रकृति के विभिन्न घटको...

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प्रदूषण के बीच सरकारी नियमों की खाद्य सुरक्षा कैसे

01-02-2015

भारत सरकार द्वारा खाद्य सुरक्षा एवं मानक (खाद्य कारोबार) का अनुज्ञापन एवं पंजीकरण नियम 2011 को पारित किया था। इसका निष्पादन विभिन्न वर्गों के विरोध के कारण लंबित था, जो कि 4 फरवरी 2015 से लागू किए जाने बाबत् समाचार पत्रों में अनुज्ञप्ति जारी की गई है। इस विस्तृत अधिनियम का सभी प्रकार के खाद्य पदार्थों के प्रसंस्करण, पैकिंग इत्यादि कार्य में लगी हुई औद्योगिक इकाईयों पर तो लागू किया ही गया है, जिसके अंतर्गत् दूध, वनस्पति तेल जैसे विपुलता में प्रयुक्त होने वाले खा...

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भारत के समाचार पत्रों के पंजीयक कार्यालय की पंजीयन संख्या( आर. एन. आर्इ. नं.) : 7087498, डाक पंजीयन : छ.ग./ रायपुर संभाग / 26 / 2012-14
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