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प्रकृति संरक्षण को समर्पित एकमात्र पत्रिका आम आदमी की भाषा में
पारिस्थितिकी
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जीव जंतु भी करते हैं नशा

01-01-2015

नशा की लत इंसान को ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों को भी लगती है। नशे के लिए पशु-पक्षी प्रकृति में उपलब्ध पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं का इस्तेमाल करते हैं। इनमें कुछ ऐसे भी नशे हैं जो जहरभरे साबित होते हैं। फिर भी पशु-पक्षी नशे के आनंद का मोह छोड़ नहीं पाते।

मधुमक्खियाॅं भांग व मैरीजुआना जैसे नशीले पौधों को बेहद पसंद करती हैं। बारहसिंगा से लेकर हाथियों तक जीव-जंतुओं की दुनिया ऐसे जानवरों से भरी पड़ी है, जो इस तरह के पौधे या कीड़े-मकोड़े जान-बूझकर खाते हैं, जिनमें हैल्य...

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कोयल की चालाकी

01-09-2014

कोयल दूसरे पक्षियों के घोंसलों में अंडे देने के लिए बदनाम है। मगर ये अन्य पक्षी जो अनजाने में कोयल के अंडों के मेजबान बनते हैं, वे भी पीछे नहीं हैं। हाल के एक अध्ययन से पता चला है कि इन पक्षियों में अपने अंडों की पहचान के लिए कुछ उपाय विकसित हुए हैं। हालांकि अभी पता नहीं है कि ये उपाय कितने कारगर और कामयाब हैं। कोयल (कुकुलस केनोरस) ऐसे अंडे देने में सक्षम हैं जो किसी मेजबान पक्षी के अंडों जैसे दिखें। और तो और, कोयल के अंडे मेजबान पक्षी के अंडों से पहले फूटते हैं ...

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खामोश हुए झिंगुर

01-09-2014

झिंगुरों की कर्कश आवाज से कौन परिचित नहीं है। रात को जब झिंगुर किर्र-किर्र करते हैं तो लगता है, सैकड़ों लोग कंघी पर नाखून रगड़ रहे हैं। मगर हाल ही में दो अलग-अलग द्वीपों पर झिगुरों की दो आबादियां पाई गई हैं, जिनमें नरों में किरकिराने की क्षमता नहीं है। ये खामोश झिंगुर जीव वैज्ञानिकों के लिए जैव विकास का आश्चर्यजनक नजारा पेश कर रहे हैं।

आवाजहीन पंख

जीव वैज्ञानिक बताते हैं कि उक्त विशिष्ट ध्वनियां सिर्फ नर झिंगुर पैदा करते हैं। इस ध्वनि की मदद से वे मादा ...

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गोत्र का पक्षी महोक

01-07-2014

अधिकांश आदिम जन-जातियों का जीवन किसी पशु-पक्षी से जुड़ा रहता है,  जिनके गोत्र के पशु-पक्षी रहते हैं, उनका शिकार करना या मारना निषिद्ध रहता है। यह परम्परा आज भी निभाई जाती है। ऐसा ही एक पक्षी महोक है, जिसे भारद्वाज, कुक्कुटकुंभा आदि नामों से जाना जाता है। वैज्ञानिक शब्दावली में इसे ग्रेटर काउसल (Greater Coucal) कहा गया है। 

छत्तीसगढ़ के बस्तर में कुम्हारिन चिड़िया के नाम से जाना जाता है। कुम्हारिन चिड़िया आदिवासी समुदाय उसेण्डी गोत्र का टोटम पक्षी है।

महोक को अक...

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मधुमक्खी पालन पर प्रश्न चिन्ह

01-07-2014

मधुमक्खी केवल शहद ही नहीं देती, बल्कि वे परागण का काम करती हैं। जहाॅं मधुमक्खियाॅं हैं, वहाॅं फसल उत्पादन अधिक होता है। मधुमक्खी का शहद अमृतमयी होता है। शहद निकालने के लिए मधुमक्खियों को ही अक्सर खत्म कर दिया जाता है। तरह-तरह के तरीके हैं। भारत में शहद उत्पादन बढ़ाने के लिए विदेशों से मधुमक्ख्यिाॅं लाई जा रही हैं। भविष्य में विदेशों से आयातित मधुमक्खियाॅं एक आफत बन सकती हैं। इस ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। व्यावसायिक रूप से मधुमक्खी पालन, उनकी ...

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भारत के समाचार पत्रों के पंजीयक कार्यालय की पंजीयन संख्या( आर. एन. आर्इ. नं.) : 7087498, डाक पंजीयन : छ.ग./ रायपुर संभाग / 26 / 2012-14
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