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प्रकृति संरक्षण को समर्पित एकमात्र पत्रिका आम आदमी की भाषा में
महत्वपूर्ण कदम
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♣ केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल को पत्र
♣ श्री प्रकाश जावडे़कर जी, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत शासन को पत्र
♣ सुश्री उमा भारती जी, मंत्री भारत शासन- जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनर्जीवन
धारा 18 1 (ब) जल अधिनियम एवं वायु अधिनियम 1981 के तहत जारी निर्देशों बाबत्।
20-03-2014

संदर्भ: US/PUT-/ दिनांक 20 मार्च 2014

 

प्रति

श्रीमान अध्यक्ष महोदय

केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल

परिवेश भवन, ईस्ट अर्जुन नगर

नई दिल्ली

 

विषय ः धारा 18 1 (ब) जल अधिनियम एवं वायु अधिनियम 1981 के तहत जारी निर्देशों बाबत्। 

संदर्भ ः आपका पत्र क्रमांक बी-29016/04/06/पीसीआई-I/5401 दिनांक 5 फरवरी 2014

 

 

महोदय,

 

उक्त पत्र के संदर्भ में हम आपके द्वारा वायु एवं जल प्रदूषण नियंत्रण हेतु किए जा रहे प्रभावशील प्रयासों के मुक्त कंठ से सराहना करते हैं एवं धन्यवाद भी देते हैं कि अनियंत्रित प्रदूषण के कारण संकटग्रस्त हो रहे पर्यावरण को बचाने के लिए इस पत्र में दिए गए निर्देश निश्चित रूप से प्रभावशाली होंगे। किन्तु, आपका ध्यान हम ऐसे छोटे एवं लघु उद्योगों की ओर आकृष्ट करना चाहते हैं, जो कि 17 (सत्रह) प्रकार के घोर प्रदूषणकारी उद्योगों में यद्यपि शामिल हैं, किन्तु उनके द्वारा इस प्रकार के सतत् निगरानी करने वाले आधुनिक एवं मंहगे उपकरणों को लगाना शायद सम्भव न हो। 

उदाहरण के स्वरूप, छोटी रोलिंग मिलें, छोटे इंडक्शन फर्नेस, छोटी कपोला फाउंड्री, छोटी-छोटी गैल्वेनाइजिंग इकाईयाॅं, जिनमें निवेश 5 करोड़ रूपए से कम होने के कारण लघु उद्योग की सीमा में वर्गीकृत की गई हैं। 

अतः हमारा आग्रह है कि उक्त निर्देश में ऐसे प्रावधान भी नियोजित किए जाएं कि लघु तथा छोटे उद्योग जो उक्त व्यवस्था को स्थापित करने में सक्ष़्ाम न हों, वे सतत् निगरानी हेतु वैकल्पिक व्यवस्था की स्थापना का सुझाव, राज्यस्तरीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल के माध्यम से केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल को प्रेषित करते हुए वैकल्पिक व्यवस्था स्थापना की अनुमति प्राप्त कर सकते हैं। 

ऐसा करने से छोटे उद्योगों एवं लघु उद्योगों को अनावश्यक अर्थ भार नहीं होगा तथा वे विधिक अवहेलना के कारण प्रताड़ित होने से बच जावेंगे। 

 

इस हेतु मेरा व्यक्तिगत सुझाव इस प्रकार है कि औद्योगिक क्लस्टर में परिवेशीय वायु गुणवत्ता मापन हेतु सामूहिक रूप से कुछ नियत स्थानों पर सतत् निगरानी उपकरण स्थापित किए जावें, जो कि सर्वर से जुड़े हुए हों तथा इसकी निगरानी एवं रखरखाव राज्य स्तरीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा किया जावे। इन उद्योगों के चिमनी से निकलने वाले धुएं पर नजर रखने के लिए छोटे वेब कैमरे स्थापित कर उसे मोबाइल नेटवर्क द्वारा प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सर्वर से जोड़ दिया जावे। रात्रि में धुएं के स्तर को देखने के लिए चिमनी के ऊपर प्रकाश व्यवस्था स्थापित करने का निर्देश दिया जावे। इसी प्रकार पृथक-पृथक इकाई के निकास में सतत् जल निगरानी व्यवस्था स्थापित करने की जगह पर औद्योगिक क्लस्टर के सामूहिक निकास के अंतिम छोर पर सतत् निगरानी व्यवस्था स्थापित की जावे। ऐसा करने से सम्पूर्ण औद्योगिक क्षेत्र के निकास जल की गुणवत्ता एवं मात्रा की निगरानी सम्भव होगी। इस प्रकार के आंकड़ों को औद्योगिक संगठनों के मुख्यालयों में भी देखने या प्रेषित करने का प्रावधान हो। 

 

आशा है, हमारे उक्त सुझावों को विषयसंगत पाया जावेगा तद्नुसार आवश्यक संशोधन उक्त निर्देश में किया जावेगा।

 

सधन्यवाद एवं सादर,

 

भवदीय

पर्यावरण ऊर्जा टाइम्स

 

 

(ललित कुमार सिंघानिया)

संपादक

प्रतिलिपि

1. श्रीमान एडवाइजर, सी.पी. डिवीजन, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत शासन, लोधी रोड, नई दिल्ली

 

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